रविवार, 26 मई 2019

देश निर्माण में जवाहरलाल नेहरू का योगदान" (पुण्यतिथि पर विशेष)

"देश निर्माण में जवाहरलाल नेहरू का योगदान"
(पुण्यतिथि पर विशेष)

दीपक कुमार त्यागी एडवोकेट
स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार


हिन्दुस्तान के शिल्पकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित जवाहरलाल नेहरू, अदभुत आकर्षक व्यक्तित्व के धनी, ओजस्वी वक्ता, उत्कृष्ट लेखक, इतिहासकार, आधुनिक भारत के स्वपनदृष्टा थे और सबसे बड़ी बात यह है कि देश में आधुनिक भारत के शिल्पकार के ख़िताब से नवाज़े जाने का श्रेय अगर किसी एक व्यक्ति को जाता है तो वो नि:संदेह हिन्दुस्तान के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु को ही जाता हैं। उन्होंने देश की आज़ादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने के साथ-साथ सशक्त हिन्दुस्तान का निर्माण करके देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेहद मजबूती के साथ नींव स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इस अनमोल योगदान के लिए हिन्दुस्तान हमेशा उनका ऋणी रहेगा। वैसे तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को ही अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी माना था  लेकिन वो आजादी से पहले गठित अंतरिम सरकार और आजाद भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री बने थे और स्वतन्त्रता के पूर्व और पश्चात् की भारतीय राजनीति में केन्द्रीय व्यक्तित्व थे। महात्मा गांधी के संरक्षण में, वे भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के सर्वोच्च नेता के रूप में उभरे और वो सन् 1947 में भारत के एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापना से लेकर सन् 1964 तक अपने निधन तक, भारत के प्रधानमंत्री रहे थे।
नेहरू आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य – एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र - के शिल्पकार मानें जाते हैं और उन्हें भारतीय बच्चे चाचा नेहरू के रूप में जानते हैं।

जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को ब्रिटिश सरकार के आधीन भारत के इलाहाबाद शहर में हुआ था । उनके पिता, मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित समुदाय से थे और वो देश के स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए थे। उनकी माता स्वरूपरानी जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थी, जवाहरलाल तीन बच्चों में से सबसे बड़े थे, जिनमें बाकी दो लड़कियाँ थी। बड़ी बहन, विजया लक्ष्मी, बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी और सबसे छोटी बहन, कृष्णा हठीसिंग, एक सुप्रसिद्ध लेखिका बनी। जवाहरलाल नेहरू को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो और वह केंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए, जहाँ उन्होंने तीन वर्ष तक अध्ययन करके प्रकृति विज्ञान में स्नातक उपाधि प्राप्त की। उनके विषय रसायनशास्त्र, भूगर्भ विद्या और वनस्पति शास्त्र थे। केंब्रिज छोड़ने के बाद लंदन के इनर टेंपल में दो वर्ष बिताकर उन्होंने अपनी लॉ की पढ़ाई पूरी की। इंग्लैंड में उन्होंने सात साल व्यतीत किए जिसमें वहां के फैबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद के लिए एक तर्कसंगत दृष्टिकोण विकसित किया।

जवाहरलाल नेहरू 1912 में भारत लौटे और वकालत शुरू की। 1916 में उनकी शादी कमला नेहरू से हुई  सन् 1917 में जवाहरलाल व कमला नेहरू को इंदिरा के रूप में एक पुत्री की प्राप्ति हुई। 1917 में जवाहर लाल नेहरू होम रुल लीग‎ में शामिल हो गए। राजनीति में उनकी असली दीक्षा दो साल बाद 1919 में हुई जब वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संपर्क में आए। उस समय महात्मा गांधी ने रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति खासे आकर्षित हुए।

पंडित जवाहरलाल नेहरू देश को प्रगति के पथ पर ले जाने वाले खास पथप्रदर्शक थे। वो शुरू से ही गांधीजी से बहुत प्रभावित रहे और नेहरू ने महात्मा गांधी के उपदेशों के अनुसार खुद को व अपने परिवार को भी ढाल लिया था । जवाहरलाल और मोतीलाल नेहरू ने पश्चिमी कपडों और महंगी संपत्ति का त्याग कर दिया था। वे अब एक खादी कुर्ता और गाँधी टोपी पहनने लगे। जवाहर लाल नेहरू ने 1920-1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया और इस दौरान पहली बार गिरफ्तार किए गए। कुछ महीनों के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। जवाहरलाल नेहरू 1924 में इलाहाबाद नगर निगम के अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में दो वर्ष तक सेवा की। 1926 में उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों से सहयोग की कमी का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चे को संगठित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। 1928 में लखनऊ में साइमन कमीशन के विरोध में नेहरू घायल हुए और 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार हुए। उन्होंने 6 माह जेल काटी। 1935 में अलमोड़ा जेल में 'आत्मकथा' लिखी। नेहरू अपने जीवन काल कुल 9 बार 3259 दिन जेल में रहे।

उन्होंने विश्वभ्रमण किया और अंतरराष्ट्रीय नायक के रूप में अपनी पहचान छोड़ी। उन्होंने 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद (लाहौर 1929, लखनऊ 1936, फैजपुर 1937, दिल्ली 1951, हैदराबाद 1953 और कल्याणी 1954) को सुशोभित किया। नेहरू ने सन् 1929 में जब कांग्रेस अध्यक्ष का पद ग्रहण किया तो रावी के तट पर प्रस्ताव पारित किया उन्होंने कहा कि ‘हम भारत के प्रजाजन अन्य राष्ट्रों की भांति अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं कि हम स्वतंत्र होकर ही रहें, अपने परिश्रम का फल स्वयं भोगें, हमें जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हों, जिसमें हमें भी विकास का पूरा अवसर मिले।’ सन् 1942 के 'भारत छोड़ो' आंदोलन में नेहरूजी 9 अगस्त 1942 को बंबई में गिरफ्तार हुए और अहमदनगर जेल में रहे, जहां से 15 जून 1945 को रिहा किए गए। 15 अगस्त सन् 1947 में भारत को आजादी मिलने पर जवाहरलाल नेहरू को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। वह देश को उस मुकाम पर खड़ा देखना चाहते थे जहां हर भारतवासी  अमनचैन, सुखी और समृद्धि से सराबोर हो। आजादी मिलने के तुरंत बाद ही उन्होंने देश में पहली एशियाई कांफ्रेंस बुलाई और उसमें साफ-साफ कहा कि ‘हमारा मकसद है कि दुनिया में अमनचैन और तरक्की हो, लेकिन यह तभी हो सकता है जब सब मुल्क आजाद हों और इंसानों की सब जगह सुरक्षा हो और आगे बढ़ने का मौका मिले।’ नेहरू ने 'पंचशील' का सिद्धांत प्रतिपादित किया और 1954 में 'भारतरत्न' से अलंकृत हुए नेहरूजी ने तटस्थ राष्ट्रों को संगठित किया और उनका नेतृत्व किया।
उन्होंने अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में देश में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करते हुए, राष्ट्र और संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थायी भाव प्रदान किया। उनका विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से देश की जनता और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हमेशा मुख्य उद्देश्य रहा।

नेहरू पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर पाए। उन्होंने चीन की तरफ मित्रता का हाथ भी बढ़ाया, लेकिन 1962 में चीन ने धोखे से आक्रमण कर दिया। चीन का आक्रमण जवाहरलाल नेहरू के लिए एक बड़ा झटका था और शायद इसी वजह से उनकी मौत भी हुई। जवाहरलाल नेहरू को 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ा जिसमें उनकी मृत्यु हो गई थी।
नेहरू का पूंजीवाद, साम्राज्यवाद, जातिवाद, एवं उपनिवेश के खिलाफ  संघर्ष हमेशा अनुकरणीय रहेगा। वो देश में धर्मनिरपेक्षता और भारत की जातीय एवं धार्मिक विभिन्नताओं के बावजूद भी वे देश की मौलिक एकता को लेकर सजग रहे और सभी को एक सूत्र में पिरोने के लिए कार्य करते रहे। कभी ऐसा निर्णय नहीं लिया जिससे कि उन पर धार्मिक या सांप्रदायिक पक्षपात का आरोप लगे। उनका हमेशा स्पष्ट मानना था कि भारत के विकास लिए सभी लोगों को प्यार मोहब्बत से मिलजुलकर एक साथ रहना होगा। नेहरू वैज्ञानिक खोजों एवं तकनीकी विकास में गहरी अभिरुचि रखते थे उन्होंने देश के विकास में इसका खूब उपयोग किया। उन्होंने देश को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए पंचवर्षीय योजनाएं बनाईं। वे हमेशा से मानते थे कि देश के किसानों और कृषि क्षेत्र को मजबूती प्रदान किए बिना देश को तरक्की की राह पर कभी आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इसलिए उन्होंने कृषि भूमि की सिंचाई के उचित प्रबंध के लिए देश में बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इन योजनाओं को उन्होंने आधुनिक भारत का तीर्थ कहा। साथ ही देश में रोजगार सृजन और तरक्की की राह को और आसान करने के लिए उन्होंने बड़े-बड़े कल-कारखानों की स्थापना की।

पंडित नेहरू एक महान राजनीतिज्ञ और प्रभावशाली वक्ता ही नहीं, बल्कि महान लेखक भी थे। उनकी रचनाओं में भारत और विश्व, सोवियत रूस, विश्व इतिहास की एक झलक, भारत की एकता और स्वतंत्रता प्रचलित है लेकिन उनकी सबसे लोकप्रिय किताबों में डिस्कवरी ऑफ इंडिया रही, जिसकी रचना 1944 में अप्रैल-सितंबर के बीच अहमदनगर की जेल में हुई। इस पुस्‍तक को नेहरू ने अंग्रज़ी में लिखा और बाद में इसे हिंदी और अन्‍य बहुत सारे भाषाओं में अनुवाद किया गया है। भारत की खोज पुस्‍तक को क्‍लासिक का दर्जा हासिल है। नेहरू जी ने इसे स्‍वतंत्रता आंदोलन के दौर में 1944 में अहमदनगर के किले में अपने 5 महीने के कारावास के दिनों में लिखा था। यह 1946 में पुस्‍तक के रूप में प्रकाशित हुई। इस पुस्‍तक में नेहरू जी ने सिंधु घाटी सभ्‍यता से लेकर भारत की आज़ादी तक विकसित हुई भारत की संस्‍कृति, धर्म और जटिल अतीत को वैज्ञानिक द्रष्टि से विलक्षण भाषा शैली में बयान किया है।


नेहरू जी ने जो काम किये थे आज उसी की नींव पर बुलंद व सशक्त भारत की नई तस्वीर रची जा रही है। नेहरू का मानवीय पक्ष भी अत्यंत उदार और समावेशी था। उन्होंने देशवासियों में निर्धनों और अछूतों के प्रति सामाजिक चेतना पैदा की। हिंदू सिविल कोड में सुधार लाकर उत्तराधिकार और संपति के मामले में विधवाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिया। नेहरू के कुशल नेतृत्व में, कांग्रेस राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय चुनावों में लगातार प्रभुत्व दिखाते हुएँ और 1951, 1957, और 1962 के लगातार चुनाव जीतते हुएँ, एक सर्व-ग्रहण पार्टी के रूप में उभरी। उनके अन्तिम वर्षों में राजनीतिक मुसीबतों और 1962 के चीनी-भारत युद्ध में उनके नेतृत्व की असफलता के बावजूद, वे भारत के लोगों के बीच हमेशा लोकप्रिय बने रहें। भारत में, उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। आज पुण्यतिथि पर हम जवाहरलाल नेहरू जी को कोटि-कोटि नमन् करते हैं।

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