बुधवार, 22 मई 2019

महावीर त्यागी जी के व्यक्तित्व ने देश के संसदीय इतिहास को एक नया आयाम प्रदान किया*

*प्रकाशनार्थ* दिनांक -22-05-2019,

*महावीर त्यागी जी के व्यक्तित्व ने देश के संसदीय इतिहास को एक नया आयाम प्रदान किया*
(22 मई पुण्यतिथि पर विशेष)

दीपक कुमार त्यागी एडवोकेट,
स्वतंत्रता पत्रकार व स्तंभकार 

कभी महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल के साथ बैठ कर देश के भविष्य की नीतियों का निर्धारण करने वाले महावीर त्यागी जी की आज पुण्यतिथि है। देश के महान स्वतंत्रता सेनानी श्री महावीर त्यागी जी का देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने में बहुत ही अहम योगदान रहा है। बिजनौर जनपद के नूरपुर क्षेत्र के रतनगढ़ निवासी महावीर त्यागी जी का जन्म 31 दिसंबर 1899 को हुआ था । वो एक अनूठे इंसान थे वे 1919 में जलियावाला बाग़ हत्या कांड के बाद ब्रिटिश सेना से त्यागपत्र देकर वे देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। वो हमेशा अपने आदर्शों पर अडिग रहे चाहें वो लम्बे समय तक जेल में रहे थे लेकिन फिर भी कभी उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
महावीर त्यागी जी की वर्ष 1920 में जिला कांग्रेस के संस्थापकों में उनकी गिनती होती थी। उसके बाद में उन्होंने अपना कार्यक्षेत्र देहरादून बना लिया। देहरादून, बिजनौर (उत्तर-पश्चिम), सहारनपुर (पश्चिम) लोकसभा क्षेत्र से 1952, 57 व 62 में सांसद रहे महावीर त्यागी जी वर्ष 1951 से 53 तक केन्द्रीय राजस्व मंत्री रहे। वर्ष 1953 से 57 तक श्री त्यागी मिनिस्टर फार डिफेंस ऑर्गेनाइजेशन (1956 तक पंडित नेहरू के पास रक्षा मंत्री का कार्यभार भी था।) रहे। उनके कार्यकाल के दौरान देश में ही रक्षा सम्बंधी सामान बड़े पैमाने पर बनाने का कार्य शुरू हुआ। वर्ष 1957 के बाद भी वह विभिन्न कमेटियों और पुनर्वास मंत्रालय में रहे।
लेकिन आज देश के संसदीय इतिहास में महावीर त्यागी जी सरीखे नेताओं का पूर्ण रूप से अभाव है अब हम देशवासियों को देश की राजनीति में कही भी इस तरह के ओजस्वी व्यक्तित्व के धनी नेता नजर नहीं आते हैं। श्री महावीर त्यागी जी को सरकार व सामाजिक जो भी दायित्व मिला उन्होंने उसका पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी के साथ के निर्वाह किया। वो सविधान सभा, लोकसभा, राज्य सभा व मंत्री रहते हुए भी हमेशा अपने आदर्शो पर अडिग रहे। देश के स्वतंत्रता सेनानियों में त्यागी जी का व्यक्तित्व बड़ा ही आकर्षक था वे बेहद हाजिरजवाब, सत्य के प्रहरी, ईमानदार, भावुक और निडर व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने जिस तरह से देश की स्वतंत्रता से पूर्व के आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की आजादी के लिए बहुत लम्बा कारावास भी भुगता उसके देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।

वो देश की पहली सरकार में केंद्रीय राजस्व मंत्री रहे महावीर त्यागी जी का
उत्तर प्रदेश में देहरादून इलाके में कोई सानी नहीं था सारा जिला त्यागी जी का अपना घर था वो आम जनमानस के बीच बहुत ही लोकप्रिय थे उन्हें जो अनुचित लगता था उसका वो तर्कसंगत ढंग से विरोध भी करते थे मगर किसी से मन में द्वेष भाव नहीं रखते।
इसी तरह जब संसद में बहस होती थी वो अपनी तार्किक बातों से सभी का ध्यान आकर्षित कर लेते थे उनके बारे में एक वाकया बहुत प्रसिद्ध है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध को लेकर संसद में बहस चल रही थी। उन दिनों अक्साई चिन के चीन के कब्जे में चले जाने को लेकर विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा काट रखा था। लेकिन जवाहरलाल नेहरू जी ने कभी नहीं सोचा होगा कि इस मसले पर विरोध में सबसे बड़ा चेहरा उनके अपने मंत्रिमंडल के सदस्य महावीर त्यागी जी के रूप में होगा। इस मसले पर जवाहर लाल नेहरू जी ने जब संसद में ये बयान दिया था कि अक्साई चिन में तिनके के बराबर भी घास तक नहीं उगती, वो बंजर इलाका है इसलिए छोड़ दिया है तो संसद में महावीर त्यागी जी ने अपनी टोपी उतारकर गंजा सिर नेहरू जी को दिखाया और कहा- यहां भी कुछ नहीं उगता तो क्या मैं इसे कटवा दूं या फिर किसी और को दे दूं। सोचिए इस तार्किक जवाब को सुनकर पूरी संसद व नेहरू जी का क्या हाल हुआ होगा? क्या आज कोई ऐसा कह सकता है ।
आज अगर ऐसे मंत्री हों तो विपक्ष की किसी को भी जरूरत नहीं है। महावीर त्यागी जी ने हमेशा यह साबित किया कि उनके लिये व्यक्ति पूजा के बजाय देश की पूजा महत्वपूर्ण है। उनको देश की एक इंच जमीन भी किसी को देना गवारा नहीं था, चाहे वो बंजर ही क्यों ना हो और व्यक्ति पूजा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी में बोलने वालों में वो सबसे आगे थे। उन्होंने ही इंदिरा गांधी जी को पार्टी का अध्यक्ष बनाये जाने का वाकायदा पत्र लिखकर विरोध किया था। लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद में सत्ता पक्ष के नेताओं का किसी मुद्दे को लेकर एक हो जाना आम है, अब कोई अपनी सरकार का मुद्दों पर आधारित विरोध करने की भी हिम्मत नहीं रखता है। वही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकार में शामिल रहे स्वतंत्रता सेनानी महावीर त्यागी ऐसे थे, जो कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने में पीछे नहीं रहते थे। उनका संसद की गरिमा को ऊंचाईयों को पहुंचाने में अहम योगदान रहा।

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी की सरकार में वित्त, राजस्व और रक्षा जैसे अहम मंत्रालय संभालने वाले महावीर त्यागी जी 1967 का लोकसभा चुनाव एकदम अंजान नए चेहरे और निर्दलीय प्रत्याशी यशपाल सिंह से हार गए थे।। कांग्रेस के दिग्गज नेता महावीर त्यागी के लिए यह चुनाव आखिरी चुनाव साबित हुआ था।

महावीर त्यागी जी वर्ष 1962 से 64 तक संसद की लोक लेखा समिति के चेयरमैन रहे। जनवरी 1966 में ताशकंद समझौते में कुछ स्थानों को पाकिस्तान को लौटाने के प्रश्न पर उन्होंने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया। महात्मा गांधी जी का सानिध्य पाने वाले श्री त्यागी सरदार पटेल, पंडित नेहरू, रफी अहमद किदवई और मदनमोहन मालवीय जी के भी बेहद करीबी रहे। उन्होंने देश में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन का जबरदस्त विरोध किया था। उनके देशप्रेम के कई किस्से बहुत मशहूर है।
ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी महावीर त्यागी जी का 22 मई 1980 को नई दिल्ली में निधन हो गया था आज पुण्यतिथि पर हम उनको कोटि-कोटि नमन् करते हैं।

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