शुक्रवार, 10 मई 2019

*भारत के इतिहास में "राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" का महत्व*

*भारत के इतिहास में "राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" का महत्व*

25 मई 1998 को, देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने घोषणा की कि 11 मई को "राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने देश में उद्योग को राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के साथ एक बहुत ही शक्तिशाली साझेदारी बनाने और विज्ञान, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक बाजारों में प्रवेश पाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के साथ ज्ञान नेटवर्क बनाने का आग्रह किया था।

भारत के इतिहास में "राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" 11 मई  का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि इसी दिन सन् 1998 में भारत विश्व की एक उभरती हुई परमाणु शक्ति बन गया था। क्योंकि 11 मई 1998 को ही भारत ने पोखरण (राजस्थान) में "आपरेशन शक्ति" को सफलता पूर्वक अंजाम देकर परमाणु परीक्षण किया था। पोखरण-II की सफलता को हासिल करने के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 11 मई 1999 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) के रूप में मनाने की घोषणा की थी। तब से भारत इसको लगातार "राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" के रूप में मनाता आ रहा है।
देश का जिस तेजी के साथ विकास हो रहा है उसमें तकनीक का बहुत बड़ा योगदान है। जिस प्रकार से आज अत्याधुनिक तकनीक के चलते आजकल नयी-नयी चीजों का विकास हो रहा है वो हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि आज तकनीक हमारी हर जरुरत को आसानी से पूरा करने में हमारी मदद करती है। ये हमारे काम को बेहतर और बहुत ही आसान बना देती है।
जरा सोचिये अगर आधुनिक तकनीक ना हो तो दूरसंचार, मेडिकल, शिक्षा, व्यापार, रक्षा, अन्तरिक्ष क्षेत्र आदि में रोजमर्रा की जिंदगी में आम लोगों व रिसर्च के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। देश को विश्व समुदाय के सामने सीना तान कर खड़ा करने व सर्वांगीण विकास करने में तकनीक की एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है आज के आधुनिक युग में उसी से विकास के नये द्वारा खुलते है। आज तकनीक के सामंजस्य से लोगों की आय भी बढ़ती है साथ ही साथ देश व विदेश तक व्यापार भी बढ़ता है। तकनीकी के क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करने समुचित बढ़ावा देने व  देश में दिन-प्रतिदिन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बहुत तेजी से काम करने के उद्देश्य से ही अब हर साल भारत में 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) के रूप में मनाया जाता है।

"राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" के पीछे का इतिहास व उद्देश्य -:

भारत ने जिस प्रकार से आधुनिक तकनीकी के माध्यम से 11 मई, 1998 को पोखरण में बहुत ही अत्याधुनिक ढंग से सफल परमाणु परीक्षण किया था ।इस ऑपरेशन का मूल नाम 'ऑपरेशन शक्ति-98' था जिसमें अत्याधुनिक पांच परमाणु उपकरणों को शक्ति I से शक्ति V के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इस पूरे पूरे ऑपरेशन को पोखरण-II के रूप में जाना जाता है। हालांकि इस से पूर्व भी वर्ष 1974 में देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी के नेतृत्व में पोखरण-I परमाणु परीक्षण  "स्माइलिंग बुद्धा" का सफल परीक्षण हुआ था। तो इस सफल परिक्षण पोखरण-II में अपना अनमोल योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, इंजीनियरों व अन्य सभी कर्मियों आदि की जबरदस्त उपलब्धियों के आधार पर, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 25 मई, 1998 को घोषणा की थी कि हर वर्ष 11 मई को "राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" के रूप में मनाया जायेगा। तब से ही हर वर्ष सन् 1999 से, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (Technology Development Board, TDB) के कुशल नेतृत्व में इस दिन को विभिन्न नयी तकनीकी के विचारों का जश्न मनाता है जिसने देश पर व इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों पर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव डाला है। इसके साथ ही "TDB" हर साल  एक विषय चुन करके यानी थीम का चयन करता है। जिसके आधार पर देश में जगह-जगह विभिन्न प्रकार के आयोजन व प्रतियोगिताओं को किया जाता हैं। यह दिन हमारे रोजमर्रा के जीवन में विज्ञान व आधुनिक तकनीक के महत्व हो भी चिह्नित करता है जिससे लोगों को समझ आता है कि आज तकनीक व विज्ञान कितनी महत्वपूर्ण है।

"राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" 11 मई के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य -:

- 11 मई 1998 को ही हमने अपने पहले भारत में तैयार एयरक्राफ्ट 'हंस-3' का सफल परीक्षण बैंगलोर से किया गया था।

- 11 मई 1998 को ही त्रिशूल मिसाइल का भी सफलता पूर्ण परीक्षण किया था । त्रिशूल (मिसाइल) कम दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली है इस समन्वित मार्गदर्शित मिसाइल विकास कार्यक्रम में (DRDO) रक्षा अनुसंधान विकास संगठन ओर(BDL) भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया था। इसका उपयोग कम उड़ान पर हमला करने वाली मिसाइलों के खिलाफ जहाज से एक विरोधी समुद्र तलवार के रूप में भी किया जा सकता है।

- 11 मई, 1998 को ही ऑपरेशन शक्ति (पोखरण -II) का भी परीक्षण किया गया था । उस समय बहुत कम देशों के पास परमाणु शक्ति होती है और भारत इस सफल परीक्षण के बाद परमाणु क्लब में शामिल होने वाला छठा देश बन गया था।

- हर वर्ष 11 मई को प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (Technology Development Board, TDB) भारत स्वदेशी प्रौद्योगिकी में अपना अनमोल योगदान देने के लिए विभिन्न व्यक्तियों को अलग-अलग श्रेणियों में राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित करता हैं।

1- स्वदेशी प्रौद्योगिकी के सफल व्यावसायीकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार,
यह पुरस्कार एक औद्योगिक चिंता के लिए दिया जाता है जिसने स्वदेशी तकनीक का सफलतापूर्वक विकास और व्यवसायीकरण किया है। मामले में, प्रौद्योगिकी डेवलपर / प्रदाता और प्रौद्योगिकी व्यापारी दो अलग-अलग संगठन हैं; प्रत्येक एक रुपये के पुरस्कार के लिए पात्र होगा। 25 लाख और एक ट्रॉफी।

2- MSMEs के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार,
यह पुरस्कार MSMEs को दिया जाता है जिसने स्वदेशी तकनीक पर आधारित उत्पाद का सफलतापूर्वक व्यवसायीकरण किया है। "TDB" द्वारा पहले दिए गए एसएसआई यूनिट अवार्ड्स का नाम बदलकर ‘एमएसएमई अवार्ड्स’ कर दिया गया है। यह रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान करता है। 15 लाख और एक ट्रॉफी।

3- प्रौद्योगिकी शुरुआत के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, प्रौद्योगिकी शुरुआत के लिए "TDB" द्वारा शुरू किए गए पुरस्कार की यह एक नई श्रेणी है। यह व्यावसायीकरण के लिए संभावित नई प्रौद्योगिकी के विकास के लिए प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप्स को दिया जाता है और रु। का नकद पुरस्कार दिया जाता है। 15 लाख और एक ट्रॉफी।

इसलिए, हम कह सकते हैं कि यह दिन हमारे जीवन में प्रौद्योगिकी व विज्ञान के महत्व को दिन-प्रतिदिन गौरवान्वित करता है और हमें करियर के क्षेत्र के रूप में विज्ञान को अपनाने के लिए प्रेरित भी करता है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) कैसे मनाते हैं

- इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया जाता है. जिसमें देश की तरक्की के लिए नई-नई तकनीकों के विचारों का स्वागत किया जाता है।

- पुरुस्कारों का भी वितरण इसी दिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता हैं। ये सम्मान उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने तकनीक क्षेत्र में अपना उत्क्रष्ट योगदान दिया है।

"राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" के कार्यक्रमों के जरिये विज्ञान और तकनीक के द्वारा होने वाले फायदों को बताया जाता है, जो सम्पूर्ण राष्ट्र को विकास की और अग्रसर करता है। तकनीक के बिना हमारे भविष्य की कल्पना करना असम्भव है। परन्तु इसके लिए हमें संतुलन और जागरूकता की भी आवश्यकता है।  इसलिए वर्ष 1999 से हर वर्ष 11 मई को "राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस" मनाया जाता है।
*जय हिन्द जय भारत*
*मेरा भारत मेरी शान मेरी पहचान*
*लेखक*
*दीपक त्यागी एडवोकेट*
*स्वतंत्र पत्रकार व अध्यक्ष*
*श्री सिद्धिविनायक फॉउंडेशन (SSVF)*

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