*जहरीले गैस चैम्बर में तब्दील होते शहरों को वायु प्रदूषण मुक्त करना बहुत बड़ी चुनौती*
देश में दिन-प्रतिदिन वायु प्रदूषण का स्तर बेहद घातक व जानलेवा होता जा रहा है, जो की हम सभी देशवासियों के स्वास्थ्य के लिये बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। आज हमारे देश का वायुमंडल दिन-प्रतिदिन जहरीले गैस चैम्बर में तब्दील होता जा रहा है लेकिन फिर भी हम सभी देशवासी व सरकार इस ज्वंलत समस्या से आँख बंद करके बेफिक्र बैठे हुए है।
आज देश में जहरीली होती आवोहवा की वजह से साँस, एलर्जी सम्बन्धी व अन्य तरह-तरह की गम्भीर बीमारियों का खतरा बहुत तेजी से हम सभी देशवासियों पर बहुत तेजी से मंडरा रहा है। जहरीली हवा के चलते देश में रोगप्रतिरोधक क्षमता घटने से व गम्भीर बीमारियों के बढ़ने से देश में मृत्युदर में काफी इजाफा हुआ है। प्रदूषण की वजह से दम तोड़ते लोगों के आकडों में साल दर साल बहुत ही तेजी से वृद्धि हो रही हैं विश्व में हर साल करोड़ों लोग वायु प्रदूषण जनित गम्भीर बीमारियों के चलते दम तोड़ रहे हैं। जहरीले वायु प्रदूषण की भयावहता का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज हमारे देश के हर छोटा व बड़ा शहर दिन-प्रतिदिन एक गैस चेम्बर के रूप में परिवर्तित होता जा रहा हैं, जिसको अगर जल्दी ही नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में बहुत बड़ी संख्या में देश के लोग वायु प्रदूषण की वजह से असमय काल के ग्रास बन जायेंगे।
अभी हाल में ही विश्व प्रसिद्ध अमेरिका के दो संस्थान "हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट" (HEI) एवं "इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन" (IHME) ने हाल ही में विश्व भर में वायु की गुणवत्ता से सम्बंधित आकडों पर अपनी एक बहुत ही विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।
जिस रिपोर्ट का शीर्षक है - "स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019" इस रिपोर्ट के अनुसार केवल भारत और चीन में ही विश्व भर में वायु प्रदूषण से होने वाली 5 मिलियन मौतों से 50% लोगों की मौत होती है जो कि बहुत ही भयावह आकड़ा हैं।
इस विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक घर से बाहर रहने या घर में वायु प्रदूषण के चलते वर्ष 2017 में स्ट्रोक, डायबिटीज, हार्ट अटैक, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े आदि की गम्भीर बीमारियों से विश्व में लगभग 50 लाख लोगों की मौत हुई है।
इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु -:
हमारे देश में घरेलू प्रदूषण के लिए पीएम 2.5 के मुख्य स्रोतों में देश में निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल, ईंधन के रूप में लकड़ी की जलावन का भारी मात्रा में उपयोग, देश के औद्योगिक कल-कारखानों में कोयले का भारी उपयोग, डीज़ल आधारित इंजन व उपकरणों एवं अन्य बहुत से कारण उत्तरदायी हैं जिसके चलते आज देश में वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत ही भयावह होती जा रही हैं।
★आकडों के अनुसार वर्ष 2017 में भारत में 846 मिलियन तथा चीन में 452 मिलियन लोग घरेलू प्रदूषण का शिकार हुए हैं.
★इस रिपोर्ट में पाया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण ही देश में अब टाइप-2 जैसी डायबिटीज़ बहुत ही तेजी से बढ़ रही है तथा इससे ग्रस्त रोगियों को अधिक नुकसान होता है।
इस रिपोर्ट में भारत की स्थिति -:
आज के समय में हमारे देश में वायु प्रदूषण अब स्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक जोखिमों के तीसरे पायदान पर पहुँच गया है जो कि अब देश में मौत का तीसरा सबसे बड़ा गम्भीर कारक बन गया है जो धूम्रपान से होने वाली मौतों के ठीक ऊपर है।
रिपोर्ट के आकडों के अनुसार देश में 2017 में असुरक्षित वायु के संपर्क में आने के कारण 1.2 मिलियन से अधिक भारतीयों की मौत हो गई थी।
1.2 मिलियन वार्षिक अकाल मौतों में से 673,100 मौतें बाह्य PM2.5 के संपर्क में आने के कारण हुईं और 481,700 से अधिक मौतें भारत में घरेलू वायु प्रदूषण के कारण हुईं थी।
2017 में भारत की लगभग 60% आबादी घरेलू प्रदूषण के संपर्क में थी। हालाँकि, रिपोर्ट यह भी मानती है कि भारत में ठोस ईंधन से खाना पकाने वाले परिवारों का अनुपात 2005 के 76% से घटकर 2017 में 60% (846 मिलियन) हो गया है जो कि LPG से संबंधित समय-समय चलाये जाने वाली सरकार की योजना के चलते हुआ है।
आकड़ो पर गौर करे तो आज हमारे देश की अधिकांश आबादी 10 µg / m3 के WHO वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देश के ऊपर PM2.5 सांद्रता वाले क्षेत्रों में रहती है तथा केवल 15% आबादी ही WHO के कम-से-कम कड़े लक्ष्य 35 µg / m3 के नीचे PM2.5 सांद्रता वाले क्षेत्रों में रहती है जो कि बहुत ही चिंताजनक हालाता है।
यहाँ पर यह भी उल्लेखनीय है कि भारत ने वायु प्रदूषण के स्रोतों में कमी करने के लिये पिछ़ले कुछ वर्षों में कुछ बहुत ही प्रभावी कदम उठाए हैं जैसे- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, घरेलू LPG कार्यक्रम, भारत स्टेज VI मानक वाले वाहनों के चलन में तेज़ी तथा नए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम, परली जलाने पर रोक व खुले में कूड़ा जलाने पर रोक आदि कदम को पूरी तरह से वायु गुणवत्ता के लिये एक निरंतर प्रतिबद्धता के साथ सख्ती से यदि इन पहलों को सरकार व आमजनों के सामांजस्य से कार्यान्वित किया जाता है तो भविष्य के आने वाले वर्षों में देश के लोगों जहरीले वायु प्रदूषण से कुछ राहत व महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ की स्थिति प्राप्त हो सकती है।
वैश्विक परिदृश्य में रिपोर्ट की अहमियत-:
इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 2017 में सबसे अधिक 2.5 हानिकारक अवयव पाए गये हैं। जिसमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल सबसे ऊपर के पायेदान पर रहने वाले देश है।
इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि प्रदूषण इसी प्रकार बरकरार रहता है तो भविष्य में लोगों के सामने बहुत ही गम्भीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न होंगे जिससे भविष्य में लोगों की जीवन प्रत्याशा (एक व्यक्ति के औसत जीवनकाल) में 20 महीने कम हो जाएगी।
हालांकि इस रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया के देशों में भूटान में सबसे कम प्रदूषण पाया गया लेकिन यहां भी आश्चर्यजनक रूप से पाया गया है कि पीएम 2.5 मानक तयशुदा मानक से अधिक है। जिस ढंग से सभी देशों ने विकास की अंधाधुंध दौड़ में प्रकृति को भारी नुकसान पहुँचाया है वृक्षों की कटाई की है बेलगाम प्रदूषण फेलाया है जिसके चलते ओज़ोन परत को होने वाला भारी नुकसान आज सभी देशों के सामने एक बहुत बड़ी गम्भीर चुनौती बन गया है।
लेकिन हमारे देश में हाल के बड़े घटनाक्रमों व राजनैतिक खबरों के चलते "स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019" शिर्षक वाली यह रिपोर्ट हमारे अखबारों की सुर्खियों में कोई जगह नहीं ले पाई थी। विश्व पटल पर प्रस्तुत की गई इस अति महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट से भारत में वायु प्रदूषण से आम-जनमानस की सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और उससे होने वाली मौतों की बेहद भयावह तस्वीर आकडों के रूप में सामने आई है। इस रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों पर आधारित देशों के 2019 तक के विस्तृत आँकड़े है। इनके आधार पर वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या को निकाला जाता है।
रिपोर्ट बताती है कि वर्ष भारत में हर वर्ष करीब लाखों लोगों की मौत वायु प्रदूषण से होती है। चीन ने इस दिशा में जो ठोस कारगर कदम उठाए हैं, उनकी वजह से वहाँ अब इन मौतों की संख्या स्थिर हो गई है, जबकि भारत में अभी भी वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या में दिन-प्रतिदिन लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट में जब भारत की वायु गुणवत्ता का अध्ययन किया गया है, तो पाया कि विश्व में सबसे अधिक भारत में वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की मृत्यु हो रही हैं जो कि हम सभी के व देशहित के लिए ठीक नहीं है।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि नाइट्रोजन, सल्फर ऑक्साइड और कार्बन खासकर पीएम 2.5 जैसे वायु प्रदूषक तत्वों को विश्व में असमय मौत का एक बहुत बड़ा कारक माना जाता है।
वैसे हमारे देश में चलन है कि समय-समय पर जिस भी संस्था द्वारा वायु प्रदूषण पर रिपोर्ट जारी की गई है इन रिपोर्टों को रिपोर्ट को हमारे देश की अधिकांश सरकारी संस्थाओं के द्वारा अस्वीकार कर अपनी-अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है। ठीक उसी प्रकार "केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड" ने अपनी रिपोर्ट में जिन शहरों को सबसे अधिक प्रदूषित शहर माना है। लेकिन फिर भी सरकार ना जानें क्यों उन शहरों के वायु प्रदूषण के संदर्भ रिपोर्टों को तवज्जो नहीं देती हैं जिस के चलते देश में ना तो प्रदूषण नियंत्रण हो पा रहा है ना सही आकड़े देशवासियों के सामने आ रहे है।
लेकिन रिपोर्ट में दी गयी इस बात से तो सहमत हुआ जा सकता है कि वायु प्रदूषण की वजह से देश में होने वाली मौतों की जो संख्या व इस रिपोर्ट में दी गई मौतों की संख्या है उसकी संख्या कम या ज्यादा हो सकती हैं। लेकिन यह भी कड़वा सत्य है कि वायु प्रदूषण के चलते देश के शहर दिन-प्रतिदिन "जहरीले गैस के चैम्बर" बनते जा रहे है और उससे अब लोग असमय काल का ग्रास बन रहे है। इस सच्चाई से अब ना तो सरकार ना ही और ना ही आम-आदमी मुँह मोड़ सकता हैं। क्योंकि अब यह सबको समझ आ गया है कि वायु प्रदूषण एक बहुत ही गम्भीर पर्यावरणीय समस्या है जिसका जल्द से जल्द कारगर समाधान करने के लिए सरकार व आम-जनमानस को प्रभावी कदम उठाने होंगे वरना इस जहरीले वायु प्रदूषण के चलते देश में लोगों को आयेदिन जान जाती रहेंगी।
लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी आज देश में प्रदूषण को लेकर बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि अब तक तमाम सरकारों व आम-जनमानस ने वायु प्रदूषण की समस्या को कभी गम्भीरता से नहीं लिया है जो कि बहुत ही घातक हैं। देश में आज भी हालत यह है कि वायु प्रदूषण कम करने की कोशिशें केवल देश के चंद बड़े शहरों दिल्ली, मुम्बई आदि जैसे बड़े-बड़े महानगरों तक केन्द्रित रहीं हैं। इस गम्भीर समस्या के मसले पर सरकारों ने छोटे शहरों के निवासियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गलत है। यह हालात तब है जब सन् 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की थी, उनमें भारत के 10 शहर शामिल थे। फिर भी अभी तक सरकार ने छोटे शहरों के प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की हैं।
एक तरफ समूची दुनिया में जहरीली वायु के चलते प्रदूषण का स्तर जानलेवा होता जा रहा है, जो कि सभी के स्वास्थ्य के लिये बहुत ही खतरनाक साबित हो रहा है। वायु प्रदूषण की भयावहता का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज देश का हर शहर एक बड़े जहरीले गैस चेम्बर के रूप में दिन-प्रतिदिन परिवर्तित हो रहा हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग वायु प्रदूषण की वजह से असमय काल के मुँह में समा रहे हैं। वाहनों से निकलने वाली खतरनाक जहरीली हवा पर्यावरण के लिये एक बेहद खतरनाक संकेत है। सवाल है कि क्या वक्त रहते हम सभी का अब भी सावधान हो जाना जरूरी नहीं हो जाता है?
अचरज की बात है कि अगर हम व स्थानीय प्रशासन अपने शहरों में वायु प्रदूषण का अन्दाजा ठीक से नहीं लगा पा रहे हैं, तो इनकी वजह से आम जनता की सेहत पर पड़ने वाले कुप्रभावों का अन्दाज हम कैसे लगा पाएँगे? इसके लिये जरूरी है कि बुनियादी ढाँचे के अभाव की स्थिति में हम वैश्विक स्तर पर किये जा रहे इन विदेशी अध्ययनों के आकड़ों पर विश्वास करके प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाये जब तक हमारा ढाँचा विकसित नहीं हो जाता है तब तक विदेशी रिपोर्ट पर विश्वास करने के अलावा हमारे पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचता है।
लेकिन यह भी कटु सत्य है कि भविष्य में जब संसाधन हो जायेंगे और हम वास्तव में अपने छोटे-छोटे शहरों और गाँवों केे प्रदूषणों के आँकड़े संग्रहित करेंगे तो सच्चाई इस विदेशी रिपोर्ट के आकड़ों से भी कहीं अधिक भयावह होगी। ऐसे में पर्यावरण मंत्रालय के लिये तब तक इस तरह की विदेशी रिपोर्ट को प्रभावी कदम उठाने के लिए निष्कर्ष आधार के तौर पर लिये जा सकते हैं। जिससे की आने वाले समय में देश में जहरीले वायु प्रदूषण को नियंत्रित किये जाने की दिशा में कारगर प्रभावी कदम उठाने में मदद मिल सकेगी।। *जय हिन्द जय भारत* ।। *मेरा भारत मेरी शान मेरी पहचान* ।।
*लेखक*
*दीपक कुमार त्यागी एडवोकेट,*
*अध्यक्ष*,
*श्री सिद्धिविनायक फॉउंडेशन (SSVF)*
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