बुधवार, 7 मार्च 2018

अन्तर्राष्ट्रीय_महिला_दिवस_शुभकामनाएँ

जगत जननी माता जगदम्बा की शक्ति अंश: ममता, त्याग, तपस्या और प्रेम की प्रतिमुर्ति नारी शक्ति को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बहुत-बहुत हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।।- दीपक त्यागी एडवोकेट # अन्तर्राष्ट्रीय_महिला_दिवस_शुभकामनाएँ

महापुरुष किसी भी राजनैतिक दल की बपौती नहीं, प्रतिमा गिरने से विचारधारा कभी खत्म नहीं होती हैं ।।

दोस्तों आज देश में आपनी राजनीति चमकाने के लिये  महापुरुषों के अपमान करने का फैशन चल गया । जिसे देखो वो ही अपनी सुविधानुसार महापुरुषों के अपने समय में लिये गये निर्णय व किये गये कार्य का आकलन करने लग जाता हैं । हम लोग भी यह सोचने के लिये तैयार नहीं होते हैं किसी भी व्यक्ति के द्वारा जो निर्णय लिया गया जाता है वो उस समयानुसार देशकाल व परिस्थितियों को देख कर लिया जाता हैं अगर हम उसका वर्षों बाद हम आकलन करने बैठ गये तो वो निर्णय उस समय के लोगों को उस समयानुसार देशकाल व परिस्थितियों के चलते सही व गलत लग सकता हैं । लेकिन इसके चलते क्या हम अपने पुर्वजों के मानसम्मान को ठेस पहुंचाने लगे तो वो उचित होगा क्या .                                                               आज देश में राजनैतिक पार्टियां अपनी राजनीति को परवान चढ़ाने के लियें सुविधानुसार  महापुरुषों व पुर्वजों के मानसम्मान से खिलवाड़ करने की ओछी हरकत करने लगें हैं जो कि देश की एकता अखंडता व अमनचैन को कायम रखने के लिये बेहद घातक हैं । क्योंकि देश में आज राजनैतिक दलों के साथ-साथ उनके बहकावे व उकसावे में आकर देश के आम लोग भी महापुरुषों को भी पार्टी विशेष से जोड़ने लगे हैं जो कि बेहद दुःखद हैं । लेकिन अब समय आ गया हैं जब देश के सभी जिम्मेदार आम नागरिकों को देश के अमनचैन को कायम रखने की खातिर ठंडे दिमाग से सोचना होगा कि महापुरुष किसी राजनैतिक दल की बपौती या धरोहर नहीं होते हैं बल्कि वो देश की अनमोल धरोहर होते हैं उनके दिखाये मार्ग से ही सीखकर देश विकास के रोज नित नये किर्तिमान स्थापित कर रहा हैं .                                                                      आज राजनैतिक दलों के लोग अपनी उकसाने वाली ओछी हरकतों से किसी की भी महापुरुष की प्रतिमा तो गिरावा सकते हैं लेकिन उनको यह भी ध्यान रखना  चाहिये कि प्रतिमा गिरने से विचारधारा कभी खत्म नहीं होती हैं। लोगों के मन व कर्म में विचारधारा हमेशा बनी रहती हैं और सबसे बड़ी बात यह हैं कि हमारें प्यारे देश में लोकतंत्र की निष्पक्ष जड़े इतनी गहरी हैं कि आप जबरन अपनी विचारधारा किसी पर भी थोप नहीं सकते हैं चाहें वो किसी की भी विचारधारा हो गांधी, पटेल, नेहरू, अंबेडकर, शास्त्री, पेरियार, इंदिरा, की हो या सावरकर, गोलवलकर, दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी की हो । सभी की विचारधारा अलग-अलग होने के बाद भी देश के आम नागरिकों के मन व कर्म में हमेशा बनी रहेंगी और यही सबसे बड़ी  खूबी भारतीयता व भारतीय लोकतंत्र को सबसे अधिक स्वतंत्र व निष्पक्ष बनाती हैं इस खूबी को हमेशा बना कर रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं । आज हम सभी देशवासियों का दायित्व हैं कि हम सभी विचारधाराओं का सम्मान करते हुए राजनैतिक दलों के उकसावे में आकर अपने महापुरुषों का अपमान ना करें ।। जय हिन्द जय भारत

रविवार, 4 मार्च 2018

देश में सोशल मीडिया का बढ़ता दुरूपयोग

दोस्तों हमारे देश में दिनप्रतिदिन सोशल मीडिया का दायरा बढ़ता जा रहा हैं आज सोशल मीडिया की लोगों को लत लग गई हैं सोशल मीडिया आम आदमी की रोजमर्रा की बेहद जरूरत की वस्तु बन गया । वैसे तो हमारे देश में अपने विचार व्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता हैं साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी का मौलिक अधिकार ही हमारे लोकतंत्र की असली बुनियाद है। देश में आज लोगों को अपने इस अधिकार के उपयोग के  लिये सोशल मीडिया ने जो असीम अवसर प्रदान किये हैं कुछ वर्षों पूर्व किसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की होगी। आज देश में सोशल मीडिया के प्लेटफार्म के माध्यम से समाज में बेहद आसानी से कोई भी व्यक्ति अपने विचार रख कर लोगों का आसानी से ध्यान आकर्षित करके बदलाव की एक नई बुनियाद रख सकता हैं। इसके सबसे बड़े उदाहरण हाल ही कुछ वर्षों के घटनाक्रम हैं जिनमें में सोशल मीडिया के माध्यम से देश में बेहद आसानी से लोगों को जोड़ कर बड़े आंदोलनों की शुरुआत हुई है जिनमें से मुख्य रूप से अरविंद केजरीवाल का आंदोलन, बाबा रामदेव का आंदोलन, अन्ना आंदोलन, निर्भया कांड के बाद यौनहिंसा के खिलाफ सारे देश में आंदोलन, रोहित वेमुला प्रकरण पर देश में छात्रों की लामबंदी जैसे आदि बेहद सफल आंदोलन रहे हैं। सोशल मीडिया की सबसे बड़ी बात अब यह बन गयी हैं कि जब से सोशल मीडिया पर आक्रामक प्रचार से दिल्ली में केजरीवाल मुख्यमंत्री बने हैं तब से सभी राजनैतिक दल चुनावों व उसके बाद भी अपनी बातों का प्रचार प्रसार करने के लिये सोशल मीडिया का जमकर उपयोग कर रहे हैं जो कि भविष्य की सकारात्मक राजनीति के लिये अच्छा संदेश है।                               लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह हैं कि आज देश में दिनप्रतिदिन सोशल मीडिया का दुरुपयोग बेहद तेजी के साथ बड़ रहा हैं जो कि देश व समाज की एकता अखंडता के लिये बेहद घातक हैं आज लोग सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे के खिलाफे दुष्प्रचार करने, धमकाने, गलतफहमी फैलाने, गलत खबरों का प्रचार करने, देश में तरह-तरह की अफवाहें फैलाने, किसी के भी खिलाफ निंदा अभियान चलाने, व्यक्ति का चरित्र हनन करने, समाज में तनाव पैदा करने, ठगी करने और धोखाधड़ी तक करने में कर रहे है जो की स्वास्थ्य समाज के लिये बेहद घातक हैं।  आज देश में इस बात का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है कि सोशल मीडिया का सकारात्मक इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है, या नकारात्मक, लेकिन देश में जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक की हाल की घटनाओं का अगर विश्लेषण करे तो यह स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग पहले से बहुत ज्यादा हो रहा हैं आयेदिन तरह-तरह की आपराधिक घटनाओं को अब सोशल मीडिया के माध्यम से अंजाम दिया जाने लगा हैं।  देश में अभी हाल की कुछ घटनाओं पर नजर डा़लेे जैसे कि हरियाणा में बाबा रामरहीम मामला, हरियाणा में ही जाटों का आरक्षण मामला, उत्तर प्रदेश के कासगंज के दंगे, मुजफ्फरनगर के दंगे, पश्चिम बंगाल में आयेदिन सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने के लिये सोशल मीडिया के दुुरुपयोग, जम्मू कश्मीर में पत्थर बाजी के लिये पत्थरबाजों की सोशल मीडिया पर बनी नेटवर्किंग, महाराष्ट्र के कोरेगांव में दंगा, उत्तर प्रदेश के साहरनपुर में जातिय हिंसा आदि घटनाएं और सबसे बड़ी चिंताजनक बात यह हैं कि आज बहुत तेजी झूठ परोसने व नकारात्मक विचारों का प्रचार-प्रसार करने का अड्डा बनता जा रहा हैं सोशल मीडिया, जिसकी तरफ सरकार को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता हैं । एक तरफ हमारी सरकार डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रम लाकर देश की तस्वीर बदलने का प्रयास कर रही है, तो दूसरी तरफ हम इस कार्यक्रम के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से सोशल मीडिया का कुछ नकारात्मक तत्व गलत इस्तेमाल करके उसका दुरुपयोग करके सरकार और देश की व्यवस्था को चुनौती देने का काम कर रहे हैं जो कि बेहद घातक हैं। देश में आज सोशल मीडिया को लोगों की जरूरत को पूरा करने का माध्यम बनाने, देश में सकारात्मक व्यवस्था परिवर्तन और सुधार का सशक्त माध्यम बनाने के बजाय कुछ लोग इस बेहद सशक्त माध्यम से नफरत के बीज बोने और हिंसा फैलाने पर लगे हुए हैं। अपनी इस ओछी हरकत से वो देश का माहौल खराब करके उसको विकास के रास्ते से डिरेल करना चाहते हैं । आज सरकार को चाहिये कि वह सोशल मीडिया पर नकारात्मक फेलानें वाले लोगों की पहचान करें कि कौन हैं ये लोग, इनके पीछे कौन लोग हैं, और जो लोग हैं उनकी इस बात की पहचान होनी चाहिए कि उनकी प्रवृत्तियां क्या हैं, उनका रुझान किस नकारात्मक उद्देश्य की तरफ हैं , वो सोशल मीडिया के माध्यम से किस तरह की गतिविधियां चला रहे हैं, साथ ही साथ सरकार को इस तरह नकारात्मक फैलानें वाले लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से समझाना चाहिये कि किस तरह के अभियान देश व समाज को लाभ हैं और किस तरह के अभियान से हानि हैं। वैसे आज हमारे देश में सोशल मीडिया के सहारे नकारात्मक फैला करके माहौल खराब करने की कोशिशों की एक लंबी फेहरिस्त हैं उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, ओड़िशा , हरियाणा दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया के दुश्प्रचार से आहत हुए हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कासगंज में सांप्रदायिक दंगे के दौरान सोशल मीडिया ने आग में घी डालने का का बाखूबी किया था।  यही हालाता बहुचर्चित सहारनपुर जातिय हिंसा में भी सोशल मीडिया ने किये थे यह तो केवल एक बानगी भर है। सोशल मीडिया के कारण आयेदिन देश के किसी ना किसी हिस्सें में कोई न कोई चिंताजनक घटना घटती रहती है। पिछले वर्ष अकेले फेसबुक से ही जुलाई से दिसंबर तक की अवधि में भारत में लगभग 719 आपत्तिजनक पोस्टों को हटाए गया था । ये वे पोस्ट थे जो कि हमारे देश के उन कानूनों का उल्लंघन करते थे जो धार्मिक भावनाएं आहत करने और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने के खिलाफ बने हुए  हैं। लेकिन सोचने वाली बात यह हैं कि इससे बहुत ज्यादा पोस्ट सोशल मीडिया पर ऐसी थी जो  आपत्तिजनक तो थे, पर मौजूदा कानूनन उन्हें हटाना आवश्यक नहीं समझा गया था । देखने व सोचने योग्य बात यह हैं कि एक छोटी-सी अवधि में इतनी बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सामग्री का होना सोशल मीडिया का एक बड़े दुरुपयोग की तरफ इशारा करता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके हम समाज को क्या देना चाहते हैं और खुद क्या मुकाम हासिल करना चाहते हैं। दोस्तों इसका नकारात्मक रूप से इस्तेमाल करके हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी जमीन तैयार कर रहे हैं यह भी सोचनीय हैं क्योंकि सोशल मीडिया की आने वाले समय मारकता और बढ़ेगी । अभी चंद दिनों पहले पश्चिम बंगाल में एक नाबालिग लड़के के एक फेसबुक पोस्ट की घटना से हमारी दो कमजोरियों का पता चलता है। पहली यह कि हमारे आपसी संबंध इतने कमजोर और खोखले हो चुके हैं कि वो आज हमारी भावनाएं जरा सी बात से आहत हो जाती हैं  यह कि क्या हम इतने असहिष्णु हो गए हैं कि हमें अपने विवेक का इस्तेमाल करना भी गवारा नहीं? दूसरी कमजोरी यह कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग कर हमें समाज में व्याप्त विभिन्न बुराईयों और विभिन्न समस्याओं पर आवाज बुलंद करनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से हम लोग आज सोशल मीडिया का इस्तेमाल देश के धार्मिक व सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के तंत्र के रूप में कर रहें हैं ।                                                        आज सोशल मीडिया के हम बयान वीरों को देश की वास्तविक समस्याएं या तो नजर नहीं आ रही हैं या हमको देश को विकास की राह पर ले जाने का सुझाव देना कतई पसंद नहीं हैं, लेकिन आज हम सोशल मीडिया के बयान वीरों की समाज में जहर फैला कर आग लगाने कि आदत से हर मसले को धार्मिक रंग देना हमारी नियति व फितरत बन गई है। जिसके नतीजतन हम अपने प्यारे देश व लोगों के सामाजिक ताने-बाने को अपने ही हाथों से तोड़ कर देश की एकता अखंडता व विकास के मार्ग में रुकावट भी बनते हैं। आज हम सभी देशवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम देश के जायज मुद्दों और राजनीति के गिरते स्तर को लेकर अपनी आंखें क्यों मूंद लेते हैं हम लोग आज उस कबुतर की तरह से हो गये हैं जो अपनी आंखें बंद करके यह सोचता हैं कि बिल्ली से उसकी जान बच गयी हम भी ठीक उसी तरह सोशल मीडिया के दुरूपयोग के खतरें को देख नहीं पा रहें हैं । दोस्तों आज सारे विश्व में जिस प्रकार सोशल मीडिया की मारक छमता हो गयी हैं वह देखने योग्य हैं अगर सकारात्मक सोच चलें  तो बहुत अच्छी और अगर नकारात्मक सचो चलें तो देश व समाज के लिये बेहद घातक हैं। अभी हाल ही के वर्षों में जिस प्रकार से मिस्र में राजनीतिक परिवर्तन के लिए, लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए- जिसे अरब वसंत (अरब स्प्रिंग) कहा गया- सोशल मीडिया का प्रयोग क्या हम भूल गए? क्या इस बात की कल्पना भी विश्व में किसी ने की होगी कि एक युवा सब्जी विक्रेता की आवाज ट्यूनीशिया से अरब के लगभग पंद्रह विभिन्न देशों में पहुंच जाएगी? क्या किसी ने सोचा होगा कि इतने अनोखे ढंग से दूरदराज के लोगों को क्रांति से जोड़ा जा सकेगा? लेकिन यह सब संभव हुआ केवल और केवल सोशल मीडिया के कारण। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के कारण ही कई देशों की सरकार के कुशासन और तानाशाही के खिलाफ भारी जन सैलाब सडकों पर उमड़ पड़ा और उसके चलते कई देशों के दिग्गज शासकों को अपनी गद्दी व जान तक गंवानी पड़ी, साथ ही कितनों को जेल की हवा भी खानी पड़ी। इससे हाल फिलहाल में इन देशों में अभी तक भले ही सबकुछ न बदला हो, लेकिन भविष्य में बहुत कुछ बदलने की उम्मीद अभी लोगों को बाकी है । लोगों को उम्मीद हैं की सब कुछ जल्द ही बदल कर देश नयी रहा पर चलेगा ।

दोस्तों अब समय आ गया हैं जब हम सभी देशवासी विचार करे कि देश के जिस ग्रामीण इलाकों में जहां पगडंडियों के सहारे नदी पार कर दुर्गम रास्तों से बच्चे पढ़ने जाते हो और फिर पढ़कर देश के विकास के लिये काम करते हो, जिस देश में विभिन्न प्रदेशों से आये मजदूर और किसान रातदिन मेहनत करके देश की जीडीपी को बढ़ाते हो जिस देश में चंद कदमों पर बोली और पानी बदल जाता हो फिर भी उसको एकता के सुत्र में पिरोकर एकजुट करके हमारे पुर्वजों ने अखंड भारत का निर्माण किया हो  । लेकिन आज सोचने वाली बात यह हैं कि उसी देश में ये कौन लोग हैं जो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संकीर्ण और नकारात्मक मानसिकता के कारण इन लोगों की सारी मेहनत पर पानी फेर कर देश में अमनचैन-भाईचारे को खत्म करने का दुस्साहस कर  देते हैं। ये चंद लोग सुविधाओं से लैस, घरों में बैठे-बैठे सोशल मीडिया के बेहद सशक्त माध्यम से देश में नफरत के बीज बो रहे हैं। आज ये चंद लोग देश में आपसी भाईचारे को खत्म करके देश के लिए चुनौती बन रहे हैं। लेकिन फिर भी अभी तक हमारे कानों पर जूं क्यों नहीं रेंगती? क्या देश व समाज को बेहतर बनाने के लिए हमारा कोई नैतिक दायित्व नहीं है? क्या हम नहीं चाहते कि हमारी आने वाली पीढ़ी एक विकसित देश में बेहद अनुशासित और साफ-सुथरे माहौल की भागीदार बने? लिहाजा, हमें देश व समाज हित में गहन आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।

आज देश में साइबरक्राइम, साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग का ज्वंलत मुद्दा ऐसा है, जिसकी अब अनदेखी नहीं की जा सकती हैं । आज सरकार को देश में तत्काल सोशल मीडिया पर नफरत भड़काने वाली सामग्री को पोस्ट व साझा करने वालों से सख्ती से निपटना चाहिये। जिनसे सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है, कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा भी रहता है। जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा पर भी आंच आ सकती है। ऐसे में इसके खिलाफ बेहद सख्त कानून की तत्काल आवश्यकता है। आज एक तरफ हमारा देश सूचना क्रांति की राह पर दिनप्रतिदिन नये आयाम स्थापित करता जा रहा हैं , वहीं दूसरी तरफ इससे जुड़ी चुनौतियां भी दिनप्रतिदिन  बढ़ती जा रही हैं इसलिए हमारे देश में भी वैसे ही कठोर कानून की जरूरत है जैसा जर्मनी में हाल ही में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री का पोस्ट व इस्तेमाल करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए बनाया गया है। इसके अंतर्गत वहाँ पर सोशल मीडिया कंपनियों को चौबीस घंटों के भीतर आपत्तिजनक सामग्री को हटाना होता हैं, अन्यथा उन पर पचास लाख यूरो से पांच करोड़ यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कंपनियों को हर छह महीने बाद सार्वजनिक रूप से बताना होता हैं कि उन्हें कितनी शिकायतें मिलीं और उन पर किस प्रकार संज्ञान लिया गया। इसके अलावा उन्हें उस यूजर की पहचान भी बतानी होती हैं, जिस पर लोगों की मानहानि या गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाया गया है। जानकारों का मानना है कि यह कानून लोकतांत्रिक देशों में अब तक का सबसे कठोर कानून है। हमारे देश की सरकार को भी अब यह समझना होगा कि हालात बिगड़ने पर इंटरनेट की सुविधा को कुछ समय के लिए बंद कर देने भर से समस्या का समाधान स्थायी नहीं होता हैं बल्कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग करने पर जर्मनी जैसी सख्त सजा की पहल करने की जरूरत है तब ही देश की एकता अखंडता बरकरार रहेगी और देश में अमनचैन कायम रहेगा ।। जय हिन्द जय भारत  ।। लेखक - दीपक कुमार त्यागी एडवोकेट , अध्यक्ष (श्री सिद्धि विनायक फॉउंडेशन गाजियाबाद SSVF )

शुक्रवार, 2 मार्च 2018

होली की कहानी एक आम आदमी की जुबानी :-

होली की कहानी एक आम आदमी की जुबानी :-
हमारे प्यारे देश भारत में कदम-कदम पर लोगों की बोली बदल जाती हैं लेकिन फिर भी हम लोग आपसी प्रेम भाईचारे से रहते हैं। इसके लिये जिम्मेवार हैं हम लोगों की संस्कृति और संस्कार जो की पल-पल खुशी से जीने के लिये हम सभी को प्रेरित करती रहती हैं। हमारे देश में हम लोग आयेदिन सेलिब्रेट करने के बहाने ढूंढते रहते हैं हम लोग एक त्योहार मना कर हटते हैं तो अगले दिन से दूसरे त्योहार को धूमधाम से मनाने के लिये जोरशोर से तैयारी शुरू कर देते है ठीक उसी प्रकार से हमारे देश में अभी कुछ दिन पहले ही  महाशिवरात्रि का पावन पर्व गया है और अब प्रेम भाईचारे व आपसी सदभाव का पर्व रंगोत्सव होली आ गया हैै। वैसे तो होली का पावन पर्व हमको बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ-साथ होली के रंगबिरंगे रंगों से सराबोर होकर आपसी प्रेम भाईचारे को मजबूत करके मौज-मस्ती मनाने का पावन पर्व है। फाल्गुन माह में धुलेंडी (रंग वाली होली) के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगबिरंगे रंगों से होली खेली जाती है। धर्मानुसार होली में जितना महत्व रंगों का है उससे कहीं अधिक महत्व होलिका दहन का है। क्योंकि इस दिन आप भगवान से प्राथर्ना करते है और ये ही वही दिन होता है जब आप अपनी कोई भी कामना पूरी करने के लिये प्रयास करते हैं और अपनी किसी भी प्रकार की बुराई को अग्नि में जलाकर खाक करने का प्रयास करते हैं। होलिका दहन या होली उत्तरी भारत में मनाये जाने वाला बहुत ही लोकप्रिय पर्व है। होलिका दहन वाले दिन को हम होली के नाम से भी जानते हैं। वैसे देश में अधिकांश जगह पर जिस दिन होली जलाई जाती है, उसे दिन को छोटी होली भी कहते हैं। हमारे देश यदि होली मनाने के पीछे की वजह का जिक्र करे तो बहुत सी कहानियां प्रचलित हैं लेकिन  होली को लेकर हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका की कथा सर्वाधिक प्रचलित है और उसके के चलते अधिकांश लोग होली मनाते हैं वह कथा हैं कि प्राचीन काल में एकबार एक बहुत ही अत्याचारी राक्षस राजा हिरण्यकश्यप ने कड़ी तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान पा लिया था कि संसार का कोई भी जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसको न मार सके और न ही वह रात में मरे, न दिन में, न पृथ्वी पर, न आकाश में, न घर में, न बाहर। यहां तक कि कोई भी शस्त्र उसे न मार पाए। हिरण्यकश्यप ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान पाकर वह अत्यंत अत्याचारी निरंकुश हो गया वह लोगों से अपनी पूजा करवाता और कहता कि वो ही सर्वशक्तिमान भगवान हैं । कुछ समय बाद एकदिन दुष्ट हिरण्यकश्यप के यहां प्रहलाद नामक पुत्र पैदा हुआ जोकि भगवान में अटूट विश्वास आस्था रखने वाला भक्त पुत्र था।  प्रह्लाद भगवान विष्णु का बेहद परम भक्त था और उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा-दृष्टि थी।                                                       जिसके चलते एकदिन हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य का स्तुतिगान व पूजा न करे। लेकिन भक्त प्रह्लाद ने उसका आदेश नहीं माना जिसके चलते हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने पर उतारू हो गया और भक्त प्रह्लाद को मारने के तरह-तरह के अनेक उपाय करने लगा लेकिन वह  प्रभु-कृपा से हर बार बचता रहा।
इसी के चलते एकदिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया जिसको अग्नि से बचने के वरदान में एक ऐसी चादर मिली हुई थी जो आग में नहीं जलती थी। अंहकारी हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता स भक्त प्रहलाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई।
योजनानुसार एकदिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने बालक भक्त प्रहलाद को गोद में उठा जलाकर मारने के उद्देश्य से वरदान वाली चादर ओढ़ धूं-धू करती आग में जा बैठी। भगवान की कृपा से वह चादर वायु के प्रबल वेग से उड़कर बालक भक्त प्रह्लाद पर जा पड़ी और चादर न होने के कारण होलिका जल कर वहीं भस्म हो गई। इस प्रकार भक्त प्रह्लाद को मारने के प्रयास में होलिका की मृत्यु हो गई।
तभी से होली का त्योहार मनाया जाने लगा।
धर्म शास्त्रों के अनुसार रंगों की होली का उत्सव मनाने से एक दिन पहले  जगह-जगह होलिका रख कर उसकी पूजा की जाती हैं और शास्त्रों के समयानुसार आग जला कर होलिका का दहन किया जाता हैं । धर्मानुसार होलिका दहन की इस अग्नि को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। हमारे यहाँ होलिका दहन का एक और महत्व है, माना जाता है कि होलिका दहन की अग्नि पर धान्य या अनाज को भूना जाता हैं जिसको की संस्कृत में हम होलका या होला भी कहां जाता हैं । इस अनाज से हम हवन पूजा भी करते हैं और साथ ही साथ प्रसाद में भी खाते हैं। हमारे यहाँ होलिका दहन की अग्नि की राख को लोग अपने माथे पर लगाते हैं जिससे उन पर भगवान की सदा कृपा बनी रहे और कोई बुरा साया ना पड़े। होलिका दहन के अलगे दिन हम लोग धुलेंडी (रंग वाली होली) का त्योहार धूमधाम से मनाते हैं यही होली के पावन पर्व की प्रचलित कथा एक आम आदमी की जुबानी हैं ।। - दीपक त्यागी एडवोकेट