जिदंगी की तलाश में हम मौत के कितने करीब आ गये , जब ये सोचा कि हम जीवन की अंधी दौड में क्या-क्या रिश्ते गवा गये , देर से आयी हमको समझ रिश्तों की हम धन कमाने के चक्कर में सब को भुला गये , ना रहा कोई अपना साथ जब हम कफन में बिना जेब लगवाये खाली हाथ दुनिया से चले गये ।।- दीपक त्यागी एडवोकेट
हम को समझना चाहिए कि धन इंपोर्ट में नहीं रिश्ते इंपॉर्टेंट है
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