शनिवार, 29 अक्टूबर 2016

दोस्तों आज जीवन में अंधकार को दूर करने वाले प्रकाश के पावन पर्व दीपावली के अवसर पर हम सभी को देश को ष्रदुषण व भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिये ।

दोस्तों आज जीवन में अंधकार को दूर करने वाले प्रकाश के पावन पर्व दीपावली के अवसर पर हम सभी को देश को  ष्रदुषण व भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिये । दोस्तों दीपावली "रोशनी का त्योहार" है एवं आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।  दीपोत्सव का यह त्यौहार हमें ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह संदेश देता है । आज देश मे ष्रदुषण व भ्रष्टाचार का अंधकार व्याप्त है इस दीपोत्सव के त्यौहार पर हमको इस अंधकार को हटाने की शुरूवात करने का संकल्प लेकर देश में स्वच्छ वायु व ईमानदारी के प्रकाश को भेलाना है  हम भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है , दीपावली यही चरितार्थ करती है। स्वच्छता व प्रकाश के पावन पर्व दीपावली पर  ईश्वर से प्रार्थना है की कि आप सभी देशवासियों के जीवन में सदैव सुख समृद्धि शांति  स्वच्छता एवं ईमानदारी का वास रहे । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी के जीवन से हमें सदा यह सीख मिलती है कि हम लोग मिलकर के रहें और मर्यादा में रहकर हर पल मानवता की सेवा करते रहे और अहंकार का त्याग करके जीवन में हमेशा सरल व  विनम्र बने रहें। आप सभी को दीपावली के पावन पर्व पर बहुत-बहुत हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।। जय श्री राम ।। जय लक्ष्मी गणेश की ।। - दीपक त्यागी एडवोकेट  

कामना करते हैं हर पल दोस्तों के आगे बढ़ाने की

कामना करते हैं हर पल दोस्तों के आगे बढ़ाने की , उम्मीद करते हैं दोस्तों से एक नये तरक्की के इतिहास लिखने की ।। दीपक त्यागी एडवोकेट

💥 संघर्ष करते है हर पल अपनों के अधिकार के लिये हम तो दोस्त 💥

💥💥💥💥💥💥💥 संघर्ष करते है हर पल अपनों के अधिकार के  लिये हम तो दोस्त , उम्मीद नहीं करते है की संघर्ष में साथ हमारा देगा कोई दोस्त , इस व्यवसायिक दौर में जिसके लिये संघर्ष करते हो दोस्त , वही मतलब निकल जाने के बाद पहचानते भी नहीं हैं दोस्त ।।- दीपक त्यागी एडवोकेट 💥💥💥💥💥💥💥

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

जिदंगी की तलाश में हम मौत के कितने करीब आ गये ।।

जिदंगी की तलाश में हम मौत के कितने करीब आ गये ,                                                                जब ये सोचा कि हम जीवन की अंधी दौड में क्या-क्या रिश्ते गवा गये ,                                                    देर से आयी हमको समझ रिश्तों की हम धन कमाने के चक्कर में सब को भुला गये ,                                 ना रहा कोई अपना साथ जब हम कफन में बिना जेब लगवाये खाली हाथ दुनिया से चले गये ।।- दीपक त्यागी एडवोकेट

गलत राजनीति नहीं अपितु गलत वो राजनेता है जिन्होनें राजनीति को समाज सेवा का माध्यम ना मान कर लूट खसौट अवैध धंधे करके धन कमाने का माध्यम मान लिया है ।।

दोस्तों आज देश में हम लोग हर वक्त राजनीति व उससे जुडे़ लोगों को गलत बताते रहते है लेकिन कटु सच्चाई यह है कि राजनीति गलत नहीं अपितु गलत वो राजनेता है जिन्होनें उसको समाज सेवा का माध्यम ना मान करके केवल छल कपट लूट खसौट अवैध धंधे करके धन कमाने का माध्यम मान लिया है और जब इस प्रकार के लोग राजनीति में होगें तो हम उनसे मान सम्मान शर्म हया कानून के पालन की उम्मीद नहीं कर सकते है । आज के बेहद व्यवसायिक दौर में जिस प्रकार से शासन , प्रशासन व राजनीति करने वाले लोगों के द्वारा धन पशु व अवैध काम करने वालों को सरंक्षण दिया जा रहा है वह सभ्य समाज के लिये बेहद घातक  आज अधिकांश धन पशु व अपराधिक प्रवर्ति के लोग राजनीति में धन कमाने के उद्देश्य से सक्रिय है किसी का भी समाज सेवा का कोई उद्देश्य नहीं है तो आप इस प्रकार के पशुओं से इंसानियत व कानून के पालन की नाजायज अपेक्षा ना करें । सबसे बड़े दुख की बात यह है कि आज किसी भी सही ईमानदार व्यक्ति को राजनीति , शासन व प्रशासन में बहुत समस्याओं का सामना करना पडता है उसको पल-पल षडंयत्रों का सामना करना पडता है जिसके चलते उनको बहुत कम कामयाबी मिल पा रही है क्योकि हम उन में से अधिकांश की तो शुरुआत में ही षडंयत्र कर-कर के भ्रुण हत्या कर देते है और जो बाकी संघर्ष करके बचते है तो वो लोगों के उदासीन रवैये को देखकर केवल अपने मान सम्मान को बचाने में लग जाते है क्योकि इनके पास दिखावे व लोगों को डराने धमकाने के लिये धन व अवैध सरंक्षण नहीं होता है तो हम लोग इनको राजनेता या किसी भी अन्य के रूप में स्वीकार नहीं करते है । आज जनता जनार्दन यानी हम लोगों की सोच भी इतनी गंदी हो गयी है कि जब किसी धन पशु अपराधिक प्रवर्ती के षडंयत्रकारी व्यक्ति  के साथ समाज को डराने वाला तामझाम होता है तो हम उसको अधिकारी व नेता नहीं बल्कि महापुरुष मानते है जो समाज के लिये बेहद घातक है जब तक हमारे आदर्श ही इस प्रकार के होगें तब तक देश में समाज , इंसानियत व कानून का इस तरह ही सरेआम चौराहे पर बलात्कार होता रहेगा । दोस्तों अब समय आ गया है कि हमको अपनी सोच बदल कर अच्छे ईमानदार लोगों का हौसला बढा कर उनको प्रमोट करना होगा तब ही हमारा व देश का भविष्य उज्वल हो सकता है  ।। जय हिन्द जय भारत ।।- दीपक त्यागी एडवोकेट

सार्वजनिक सम्पति को दंगा फसाद में आये दिन नुकसान पहुंचाते नादान लोग

देश में आज हालात यह है कि आये दिन सार्वजनिक सम्पत्ति को दंगा फसाद में  लोग नुकसान पहुंचाते है चंद ना समझ लोग अभी तक यह समझने के लिये तैयार नहीं है कि देश का नुकसान हमारा नुकसान होता है ।  सरकार को इस तरह की हरकत करने वालों पर सख्ती से कानून का पालन करते हुए सरकारी व निजी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से ही उसका हर्जाना वसूलना चाहिये तब ही देश में अपना विरोध जताने का ये गलत तरीका बंद होगा ।। जय हिन्द जय भारत ।। - दीपक त्यागी एडवोकेट

1965 भारत पाक जंग में डोगरई मोर्च की लड़ाई के हीरो मेजर आशाराम त्यागी जी को शत्-शत् नमन

1965 भारत पाक जंग में डोगरई मोर्च की लड़ाई के हीरो मेजर आशाराम त्यागी जी को शत्-शत् नमन ।।                                                                'जिंदा या मुर्दा डोगरई में मिलना है' के प्रण के साथ
6 सितंबर, 1965 को सुबह 9 बजे 3 जाट बटालियन ने इच्छोगिल नहर की तरफ़ बढ़ना शुरू किया.
नहर के किनारे हुई लड़ाई में पाकिस्तानी वायु सेना ने बटालियन के भारी हथियारों को बहुत नुक़सान पहुंचाया. इसके बावजूद 11 बजे तक उन्होंने नहर के पश्चिमी किनारे पर पहले बाटानगर पर कब्ज़ा किया ।
लेकिन भारतीय सेना के उच्च अधिकारियों को उनके इस कारनामे की जानकारी नहीं मिल पाई. डिवीजन मुख्यालय को कुछ ग़लत सूचनाएं मिलने के बाद उनसे कहा गया कि वो डोगरई से 9 किलोमीटर पीछे हट कर संतपुरा में पोज़ीशन ले लें.
वहाँ उन्होंने अपने ट्रेन्चेज़ खोदे और पाकिस्तानी सैनिकों के भारी दबाव के बावजूद वहीं डटे रहे.
21 सितंबर की रात को 3 जाट ने डोगरई पर फिर हमला कर दोबारा उस पर कब्ज़ा किया, लेकिन इस लड़ाई में दोनों तरफ़ से बहुत से सैनिक मारे गए.
"21 सितंबर की रात जब कर्नल हेड ने अपने सैनिकों को संबोधित किया तो उनसे दो मांगें की. एक भी आदमी पीछे नहीं हटेगा. और दूसरा ज़िदा या मुर्दा डोगरई में मिलना है. उन्होंने कहा अगर तुम भाग भी जाओगे, जब भी मैं लड़ाई के मैदान में अकेला लड़ता रहूँगा. तुम जब अपने गाँव जाओगे तो गाँव वाले अपने सीओ का साथ छोड़ने के लिए तुम पर थूकेंगे."
सीओ साहब मर गए तो क्या करोगे?
इसके बाद जब सारे सैनिकों ने खाना खा लिया तो वो अपने सहयोगी मेजर शेखावत के साथ हर ट्रेंच में गए और सिपाहियों से कहा, "अगर हम आज मर जाते हैं तो ये बहुत अच्छी मौत होगी. बटालियन आपके परिवारों की देखभाल करेगी. इसलिए आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है."
"कर्नल हेड की बात सुन कर लोगों में जोश भर गया. उन्होंने एक सिपाही से पूछा भी कि कल कहाँ मिलना है तो उसने जवाब दिया डोगरई में. हेड ने तब तक जाटों की थोड़ी बहुत भाषा सीख ली थी. अपनी मुस्कान दबाते हुए वो बोले, ससुरे अगर सीओ साहब ज़ख्मी हो गया तो क्या करोगे. सिपाही ने जवाब दिया, सीओ साहब को उठा कर डोगरई ले जाएंगे, क्यों कि सीओ साहब के ऑर्डर साफ़ हैं... ज़िदा या मुर्दा डोगरई में मिलना है."
हमला शुरू हो चुका है
54 इंफ़ैंट्री ब्रिगेड ने दो चरणों में हमले की योजना बनाई थी. पहले 13 पंजाब को 13 मील के पत्थर पर पाकिस्तानी रक्षण को भेदना था और फिर 3 जाट को हमला कर डोगरई पर कब्ज़ा करना था.
लेकिन हेड ने ब्रिगेड कमांडर से पहले ही कह दिया था कि 13 पंजाब का हमला सफल हो या न हो, 3 जाट बटालियन दूसरे चरण को पूरी करेगी. 13 पंजाब का हमला असफल हो गया और ब्रिगेड कमांडर ने वायरलेस पर हेड से उस रात हमला रोक देने के लिए कहा.                                                        कर्नल हेड ने कमाँडर की सलाह मानने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा, हम हमला करेंगे, बल्कि वास्तव में हमला शुरू हो चुका है.
ठीक 1 बज कर चालीस मिनट पर हमले की शुरुआत हुई. डोगरई के बाहरी इलाके में सीमेंट के बने पिल बॉक्स से पाकिस्तानियों ने मशीन गन से ज़बरदस्त हमला किया.
सूबेदार पाले राम ने चिल्ला कर कहा, "सब जवान दाहिने तरफ़ से मेरे साथ चार्ज करेंगे." कैप्टेन कपिल सिंह थापा की प्लाटून ने भी लगभग साथ साथ चार्ज किया.
जो गोली खा कर गिरे उन्हें वहीं पड़े रहने दिया गया. पाले राम के सीने और पेट में छह गोलियाँ लगीं लेकिन उन्होंने तब भी अपने जवानों को कमांड देना जारी रखा.
हमला कर रहे 108 जवानों में से सिर्फ़ 27 जीवित बच पाए. बाद में कर्नल हेड ने अपनी किताब द बैटिल ऑफ़ डोगरई मे लिखा, "ये एक अविश्वसनीय हमला था. इसका हिस्सा होना और इसको इतने नज़दीक से देख पाना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी."
*****"कंपनी कमांडर आसाराम त्यागी की बहादुरी"*****
कैप्टेन बीआर वर्मा अपने सीओ से 18 गज़ पीछे चल रहे थे कि अचानक उनकी दाहिनी जाँग में कई गोलियाँ आकर लगीं और वो ज़मीन पर गिर पड़े.
21 सितम्बर 1965 की रात को कंपनी कमांडर मेजर आसाराम त्यागी को भी दो गोलियाँ लगीं, लेकिन उन्होंने लड़ना जारी रखा. उन्होंने एक पाकिस्तानी मेजर पर गोली चलाई और फिर उस पर संगीन से हमला किया.
इस बीच बिल्कुल प्वॉएंट ब्लैंक रेंज से उनको दो गोलियाँ और लगीं और एक पाकिस्तानी सैनिक ने उनके पेट में संगीन भोंक दी.
वो अपना लगभग खुल चुका पेट पकड़ कर जैसे ही गिरे हवलदार राम सिंह ने एक बड़ा पत्थर उठा कर उन्हें संगीन भोंकने वाले पाकिस्तानी सिपाही के सिर पर दे मारा.
मेजर वर्मा बताते हैं, "त्यागी कभी बेहोश हो रहे थे तो कभी उन्हें होश आ रहा था. मैं भी घायल था. मुझे उस झोंपड़ी में ले जाया गया जहाँ सभी घायल सैनिक पड़े हुए थे. जब घायल लोगों को वहाँ से हटाने का समय आया तो त्यागी ने मुझसे कराहते हुए कहा, आप सीनियर हैं, पहले आप जाइए. मैंने उन्हें चुप रहने के लिए कहा और सबसे पहले उनको ही भेजा. उनका बहुत ख़ून निकल चुका था."
मेजर शेख़ावत बताते हैं, "त्यागी बहुत पीड़ा में थे. उन्होंने मुझसे कहा सर, मैं बचूंगा नहीं. आप एक गोली मार दीजिए. आपके हाथ से मर जाना चाहता हूँ. हम सभी चाहते थे कि त्यागी ज़िंदा रहें."
तमाम प्रयासों के बावजूद 25 सिंतंबर को भारत माता के लाड़ले सपूत मेजर आशाराम त्यागी जी इस दुनिया से चल बसे ।
सुबह के तीन बजते बजते डोगरई पर भारतीय सैनिकों का कब्ज़ा हो गया. सवा छह बजे भारतीय टैंक भी वहाँ पहुंच गए और उन्होंने इच्छोगिल नहर के दूसरे किनारे पर गोलाबारी शुरू कर दी जहाँ से भारतीय सैनिकों पर भयानक फ़ायर आ रहा था.
3 जाट बटालियन के सैनिकों ने झोंपड़ी में छिपे हुए पाकिस्तानी सैनिकों को पकड़ना शुरू किया. पकड़े जाने वालों में थे लेफ़्टिनेंट कर्नल जे एफ़ गोलवाला जो कि 16 पंजाब (पठान) के कमांडिंग ऑफ़ीसर थे.
इच्छोगिल नहर पर लांस नायक ओमप्रकाश ने भारत का झंडा फहराया. वहाँ मौजूद लोगों के लिए यह बहुत गर्व का क्षण था. बाद  में इस लड़ाई के लिये लेफ़्टिनेंट कर्नल डी एफ़ हेड, मेजर आसाराम त्यागी और कैप्टेन के एस थापा को महावीर चक्र दिया गया ।।