रविवार, 24 अप्रैल 2016

आज कल हम पश्चिमी सभ्यता से बहुत अधिक प्रभावित हो रहे हैं। हम अपने देश की संस्कृति को भूलने लगे हैं, परन्तु हमारी सभ्यता भी बेहतरीन है, बेहतरीन ही नहीं सर्वश्रेष्ठ है। आइये देखते है क्या बनता है मेरे देश को सरे जहान से अच्छा है।



आज कल हम पश्चिमी सभ्यता से बहुत अधिक प्रभावित हो रहे हैं। हम अपने देश की संस्कृति को भूलने लगे हैं, परन्तु हमारी सभ्यता भी बेहतरीन है, बेहतरीन ही नहीं सर्वश्रेष्ठ है। आइये देखते है क्या बनता है मेरे देश को सरे जहान से अच्छा है।

अटूट संस्कृति : भारत की संस्कृति सिन्धु घटी की सभ्यता से प्रारंभ हुई। उस समय की कई परंपरा आज भी कायम है। हिन्दू धर्म के प्रमुख के देव शिव, स्वास्तिक का चिन्ह, योग, सारी का पहनावा इत्यादि उन्हीं की देन है।

उसके बाद आर्यन भारत अये पर उन्होंने पहले से चली आ रही सभ्यता का अंत नहीं करा बल्कि इससे में मिल गए। १२ शताब्दी के करीब भारत में अरबी व ईरानी हमलावर आये और अपने साथ अपनी संस्कृति भी लाये। इस संस्कृति ने यहाँ की सभ्यता को नष्ट करने के बजाये इस और भी विविध बना दिया। हमारे आज का खाना पीना (मुगलई), पहनावा(शेरवानी, सलवार, कुरता ) और भाषा (हिंदी, उर्दू ) इसी एकीकरण का नतीजा है।

लगभग २५० वर्ष पूर्व हम पर यूरोपीय साम्राज्यवादी ताकतों का हमला हुआ। इतिहास गवाह है जहाँ-जहाँ ये लोग गए वहां पर इन लोगों ने उस देश की स्वदेशी भाषा, धर्म, तौर-तरीके, पहनावे को अपनी तरह कर दिया, पर भारत में ऐसा न हो सका । हमने दफ्तर जाने के लिए तो "शर्ट-पेंट" पहनना आरंभ कर पर नाचते अभी भी "लुंगी" में हैं। एसी अविच्छिन्नता पता नहीं कैसे आयी पर मुझे इस पर गर्व है।

आधुनिक विज्ञान का जनक : भारत ने इस विश्व को एक एसी वास्तु दी जिसके बिना आज का कोई भी वैज्ञानिक चमत्कार संभव न हो पता। और वह चीज़ है "शून्य" । शून्य ने गणित की मूल समझ को पूर्णता बदल दिया। इसकी वजह से गिनती सरल और अनंत हो गई । आप ने बचपन में रोमन गिनती पढ़ी होगी, उसमें लिखना कितना कठिन होता था हर कुछ देर बाद चिह्न बदल जाते थे और उसमें कुछ चिह्न बाद गनती का अंत भी हो जाता था। क्या आप रोमन में बीज गणित और त्रिकोणमिति करने का प्रयास कर भी सकते हैं?

एकता की मिसाल : हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरु ने कहा था की यहाँ "विविधता में एकता" है और बेशक इसमें कोई दोहराए नहीं है। विश्व में २-३ भाषा बोलने वाले समुदाय आपस में एक साथ नहीं रह पाते (यूरोप इस जीती जगती मिसाल है)। हमारे यहाँ २२ आधिकारिक भाषा है, और ८०० से अधिक बोलियाँ। कई लोगों ने कहा था की भारत आज़ादी के कुछ वर्षों के बाद टूट जाएगा और हम उन्हें ६५ वर्षों से झुठलाते आ रहे हैं।

भाषा में व्याकरण : पहले भाषा कैसे भी लिखी जा सकती थी उसमें व्याकरण की कोई आवश्यकता नहीं थी। भारत ने ही सर्वप्रथम भाषा को व्याकरण दिया। इससे भाषा में स्थिरता आई और इसके कारण ही विश्व के महान ग्रंथों की उत्पत्ति हो सकी। संस्कृत भाषा का सबसे पहले व्यक्रिकरण करा गया। भाषा वैज्ञानिक पाणिनि ने संस्कृत के लिए इतने उत्तम नियम बनाये कि संस्कृत को आज कंप्यूटर पर इस्तेमाल करे जाने के लिए सबसे योग्य भाषा मन जाता है।

भारत के योगदान की व्यापक सूची बनाना असंभव है। ये उदाहरण तो बस इस महान सभ्यता का अंश मात्र हैं। तो अगली बार जब आप पश्चिमी संस्कृति के पीछे भागे तो स्मरण रखिये गा की उसकी सफलता में कितना बड़ा योगदान आपके राष्ट्र का है।

1 टिप्पणी:

  1. हमारे देश की संस्कृति इतिहास पर हम लोग नजर डालें तो बहुत गौरवशाली है इसलिए हमें एक दूसरे से प्रभावित होने की जगह अपनी संस्कृति से प्रभावित होना चाहिए

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