गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

देश में बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते जहरीली होती आबोहवा



देश में बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते जहरीली होती आबोहवा

हस्तक्षेप / दीपक कुमार त्यागी 
स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार


देश की राजधानी दिल्ली व एनसीआर का क्षेत्र दीपावली के त्यौहार के बाद से एकबार फिर मीडिया की जबरदस्त चर्चाओं में शामिल है। हर बार की तरह इस बार भी चर्चा की वजह है दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण, अपने जानलेवा वायु प्रदूषण के लिए विश्व में प्रसिद्ध हो गयी देश की राजधानी दिल्ली दीपावली के बाद से काले धुएं के बादलों के आगोश में छिपी हुई है। वायु प्रदूषण के चलते लोगों को भगवान सूर्यदेव के दर्शन बहुत ही मुश्किल से हो पा रहे हैं। 

"लेकिन हम है कि फिर भी सुधारने का नाम नहीं लेते हैं अपने ही हाथों से अपने प्यारे चमन में आग लगा लेते हैं और स्वर्ग सी भूमि को स्वयं ही प्रदूषित करके नरक बना लेते हैं"

हम सभी अपने चारों तरफ देखे तो ईश्वर की बनाई इस अद्भुत दुनिया के निराले प्राकृतिक नजारों को देखकर हमारा तन-मन प्रफुल्लित हो जाता है। भगवान ने हमको प्रकृति की गोद में हर तरफ कल-कल करती नदियां, प्राकृतिक संगीतमय झरने, मनमोहक प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त पहाड़, तरह-तरह के सुंदर जीव-जंतु, सुंदर फूल, कंदमूल-फल, तरह-तरह के अनाज, बेल-लताएं, हरे-भरे छोटे और विशालकाय वृक्ष, प्यारे-प्यारे चहचहाते पक्षी आदि से परिपूर्ण साक्षात स्वर्ग रूपी सुंदर संसार दिया है, यह वो संसार है जो आदिकाल से और आज भी हम सभी इंसानों के आकर्षण का हमेशा केंद्र बिंदु रहा है। लेकिन आज इंसान ने अपनी जिज्ञासा और नई-नई खोज की अभिलाषा में जब से प्रकृति के कार्यो में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है, तब से पर्यावरण की हालात दिन-प्रतिदिन चिंताजनक होकर बेहद प्रदूषित होती जा रही है। आज देश में हालात यह हो गये हैं कि देश में बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते दिन आबोहवा जहरीली होने के चलते हमारे शहर व गांव तक भी गैस चैम्बर में तब्दील हो रहे है। विज्ञान के द्वार उपलब्ध उन्नत तकनीक के बाद भी आजकल सभी लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ आक्सीजन तक मिलना दुश्वार होता जा रहा है। आज स्थिति यह हो गयी है कि हम अपने परिवारों, दोस्तों व परिचितों का बहुत ख्याल रखते हैं, परंतु जब बात पर्यावरण के संरक्षण और उसके ध्यान रखने की आती है तो हम केवल प्रथ्वी दिवस, पर्यावरण दिवस, गांधी जयंती, आदि पर वृक्षारोपण करके या फिर सरकार प्रायोजित स्वच्छ भारत अभियान चला करके पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने दायित्वों की इतिश्री कर लेते है। लेकिन अब समय आ गया है कि हमको पृथ्वी को प्रदूषण से मुक्त करने के बारे में ठोस कारगर पहल कागजों से निकलकर धरातल पर करनी होगी तब ही हम प्रकृति का संरक्षण करके हर तरह के प्रदूषण से बच सकते हैं। 

वैसे तो आज जहरीली होती आबोहवा ने दुनिया भर के लोगों को परेशान कर रखा है, लेकिन हमारे प्यारे देश भारत पर इसका असर कुछ ज्यादा ही गम्भीर रूप से होता नजर आ रहा है। 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण की वजह से 20 लाख लोग हर वर्ष असमय काल का ग्रास बन जाते हैं जो बेहद चिंताजनक स्थिति हैं। हर वर्ष की तरह ही इस बार भी दीपावली के पावन पर्व को हर्षोल्लास से मनाने के बाद, लोगों को घरों के अंदर व बाहर सड़कों पर हर जगह आंखों में जलन से लेकर सांस लेने तक में तकलीफ हो रही है। प्रदूषण के चलते कुछ लोगों को तो अस्पताल जाकर उपचार तक कराना पड़ रहा है। हालांकि फिर भी देश में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो रोजमर्रा के जीवन संघर्ष में रोजीरोटी कमाने के जुगाड़ व काम की आपाधापी में वायु प्रदूषण से होने वाली परेशानी को अनदेखा कर अपने कर्तव्यों का निर्वाह लगातार करते रहते हैं। वायु प्रदूषण पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो अब वायु प्रदूषण हर वक्त हर पल हम लोगों के जीवन को चुनौती दे रहा है, लेकिन यह हर वर्ष दीपावली के पावन पर्व के बाद ऊपर हवा में सामान्य से दस गुना तक बढ़ जाने के चलते सभी को स्पष्ट नजर आने लगती हैं। सोचनीय बात यह है कि आज वायु प्रदूषण के चलते हर छोटे बड़े शहर की आबोहवा में गम्भीर बीमारियों को जन्म देने वाले विषैले प्रदूषक तत्‍वों का भंडार मंडरा रहा है। लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं कि इस बार लोगों के कुछ जागरूक होने की वजह से और हवा चलती रहने की वजह से दिल्ली व एनसीआर में दीपावली पर वायु प्रदूषण पिछले वर्षों की तुलना में कुछ कम हुआ है। लेकिन अगर हम वायु प्रदूषण के लिए केवल दीपावली की आतिशबाजी को जिम्मेदार ठहराएंगे तो यह नाइंसाफी होगी। इतना जरूर हैं कि हर वर्ष दीपावली पर होने वाली आतिशबाजी के बाद हवा में प्रदूषण इस कदर बढ़ जाता हैं कि वो एकदम सबके लिए एक बेहद चुनौती पूर्ण गंभीर समस्या बन जाता है और आम लोगों को दिक्कत होने के चलते सभी को नजर आने लगता है।

यहाँ उल्‍लेखनीय है कि वायु प्रदूषण की गम्भीर समस्‍या से निपटने के लिए 'पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय' ने राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) शुरू कर रखा है। यह सरकार की एक मध्‍यमकालिक पंचवर्षीय कार्य योजना है जिसमें देश के 102 शहरों में पीएम 2.5 और पीएम 10 (सूक्ष्‍म धूल कण) के स्‍तर में 20-30 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय कमी करने के लक्ष्‍य रखे गये हैं। इन 102 शहरों में से 84 शहरों ने अपनी-अपनी कार्य योजनाएं पहले ही पेश कर दी हैं। एनसीएपी का मुख्‍य उद्देश्‍य देश भर में वायु प्रदूषण को नियंत्रण में रखते हुए उसमें उल्‍लेखनीय कमी सुनिश्चित करना है। क्योंकि आज हमारे देश में जिस तरह से दिन-प्रतिदिन वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है उसका निदान करना आमजन के साथ-साथ सरकार के लिए भी बहुत बड़ी चुनौती है। क्योंकि देश में अब वायु प्रदूषण का स्तर दिन-प्रतिदिन बेहद घातक व जानलेवा होता जा रहा है। जो की हम सभी देशवासियों के जानमाल व स्वास्थ्य के लिये बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। जिस तरह से हाल के वर्षों में बहुत ही तेजी से हमारे देश का वायुमंडल जहरीले गैस चैम्बर में तब्दील होता जा रहा है वह चिंता का विषय है। लेकिन फिर भी हम सभी देशवासी व सरकार इस ज्वंलत समस्या का कारगर समाधान ना करके , कबूतर की तरह आँख बंद करके बेफिक्र बैठे हुए है, यह स्थिति सोचनीय है।

आज देश में जहरीली होती आबोहवा की वजह से साँस, एलर्जी सम्बन्धी व अन्य प्रकार की तरह-तरह की गम्भीर बीमारियों का खतरा हम सभी देशवासियों पर बहुत तेजी से मंडरा रहा है। जहरीली हवा के चलते लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटने से व गम्भीर बीमारियों के बढ़ने से देश में मृत्युदर में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। प्रदूषण की वजह से दम तोड़ते लोगों के आकडों में साल दर साल बहुत ही तेजी से वृद्धि हो रही है। जहरीले वायु प्रदूषण की भयावहता का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज हमारे देश का हर छोटा व बड़ा शहर एक गैस चैम्बर के रूप में परिवर्तित होता जा रहा हैं, जिसको अगर जल्दी ही नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में बहुत बड़ी संख्या में देश के लोग वायु प्रदूषण की वजह से असमय काल के ग्रास बन जायेंगे। प्रदूषण   के इस मसले पर कुछ समय पहले विश्व प्रसिद्ध अमेरिका के दो संस्थान "हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट" (HEI) एवं "इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन" (IHME) ने हाल ही में विश्व भर में वायु की गुणवत्ता से सम्बंधित आकडों पर अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी। जिस रिपोर्ट का शीर्षक था - "स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019" इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में वायु प्रदूषण से होने वाली 5 मिलियन मौतों में से 50% मौत केवल भारत और चीन में ही होती है जो कि बहुत ही भयावह  स्थिति को दर्शाने वाले आकड़े हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक घर से बाहर रहने या घर में वायु प्रदूषण के चलते वर्ष 2017 में स्ट्रोक, डायबिटीज, हार्ट अटैक, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े आदि की गम्भीर बीमारियों से विश्व में लगभग 50 लाख लोगों की मौत हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार आज भारत में वायु प्रदूषण अब स्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक जोखिमों के तीसरे पायदान पर पहुँच गया है, जो कि अब देश में मौत का तीसरा सबसे बड़ा गम्भीर कारक बन गया है। जो देश में धूम्रपान से होने वाली मौतों के ठीक ऊपर है। रिपोर्ट के आंकडों के अनुसार वर्ष 2017 में असुरक्षित प्रदूषित वायु के संपर्क में आने से 6,73,100 मौतें बाह्य PM2.5 के संपर्क में आने के कारण हुईं और 4,81,700 से अधिक मौतें भारत में घरेलू वायु प्रदूषण के कारण हुईं थी। 2017 में भारत की लगभग 60% आबादी घरेलू प्रदूषण के संपर्क में थी। आंकड़ों पर गौर करे तो आज हमारे देश की अधिकांश आबादी 10 µg / m3 के WHO वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देश के ऊपर PM2.5 सांद्रता वाले क्षेत्रों में रहती है तथा केवल 15% आबादी ही WHO के कम-से-कम कड़े लक्ष्य 35 µg / m3 के नीचे PM2.5 सांद्रता वाले क्षेत्रों में रहती है। इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि वायु प्रदूषण इसी प्रकार बरकरार रहता है तो भविष्य में लोगों के सामने बहुत ही गम्भीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न होंगे जिससे भविष्य में लोगों की जीवन प्रत्याशा (एक व्यक्ति के औसत जीवनकाल) में 20 महीने कम हो जाएगी।
इस रिपोर्ट में जब भारत की वायु गुणवत्ता का अध्ययन किया गया है, तो पाया कि विश्व में सबसे अधिक भारत में वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की मृत्यु हो रही हैं जो कि भविष्य में देशहित के लिए ठीक नहीं है। यहाँ उल्लेखनीय है कि नाइट्रोजन, सल्फर ऑक्साइड और कार्बन खासकर पीएम 2.5 जैसे वायु प्रदूषक तत्वों को असमय मौत का एक बहुत बड़ा कारक माना जाता है। ठीक उसी प्रकार "केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड" ने अपनी रिपोर्ट में जिन शहरों को सबसे अधिक प्रदूषित शहर माना है। लेकिन फिर भी सरकार ना जानें क्यों उन शहरों के वायु प्रदूषण के संदर्भ में आयी रिपोर्टों को खास तवज्जो नहीं देती हैं, जिसके चलते देश में ना तो सही ढंग से प्रदूषण नियंत्रण हो पा रहा है ना ही सही आंकड़े सभी देशवासियों के सामने आ रहे हैं। लेकिन विदेशी संस्थाओं की रिपोर्ट में दी गयी इस बात से तो सहमत हुआ जा सकता है कि वायु प्रदूषण की वजह से देश में होने वाली मौतों की जो संख्या व इस रिपोर्ट में दी गई है उसकी संख्या कम या ज्यादा तो हो सकती हैं, लेकिन यह भी कड़वा सत्य है कि वायु प्रदूषण के चलते देश के शहर दिन-प्रतिदिन जहरीले गैस के चैम्बर बनते जा रहे है और उससे अब लोग असमय काल का ग्रास बन रहे हैं। इस सच्चाई से अब ना तो सरकार और ना ही आम-आदमी मुँह मोड़ सकता हैं। क्योंकि अब यह सबको समझ आ गया है कि वायु प्रदूषण एक बहुत ही गम्भीर पर्यावरणीय समस्या है जिसका जल्द से जल्द कारगर समाधान करने के लिए सरकार को आम-जनमानस के सहयोग से प्रभावी कदम उठाने होंगे, वरना इस जहरीले वायु प्रदूषण के चलते देश में लोगों की आये-दिन जान जाती रहेंगी। इतना कुछ होने के बाद भी आज देश में वायु प्रदूषण को लेकर बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि दिल्ली सरकार को छोडकर अब तक देश के बाकी राज्यों की तमाम सरकारों व आम-जनमानस ने वायु प्रदूषण की इस समस्या को कभी गम्भीरता से नहीं लिया है जो कि भविष्य के लिए बहुत ही घातक स्थिति है। देश में आज भी हालत यह है कि वायु प्रदूषण कम करने की कोशिशें केवल देश के चंद बड़े शहरों दिल्ली, मुम्बई आदि जैसे बड़े-बड़े महानगरों तक केन्द्रित रहीं हैं। इस गम्भीर समस्या के मसले पर सरकारों ने छोटे शहरों व गांवों के निवासियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक स्थिति है। यह हालात तब है जब वर्ष 2016 में "विश्व स्वास्थ्य संगठन" ने दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की थी, उनमें भारत के 10 शहर शामिल थे। फिर भी अभी तक सरकार ने छोटे शहरों व गांवों के प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस कारगर पहल नहीं की है। सबसे अचरज की बात यह है कि ना तो हम व ना ही स्थानीय प्रशासन अपने शहरों में वायु प्रदूषण का अन्दाजा ठीक से नहीं लगा पा रहे हैं, तो इसकी वजह से आम जनता की सेहत पर पड़ने वाले कुप्रभावों का अन्दाज हम ठीक प्रकार से कैसे लगा पाएँगे? इसके लिये जरूरी बुनियादी ढाँचे के अभाव की स्थिति में हम वैश्विक स्तर पर किये जा रहे इन विदेशी आकड़ों पर विश्वास करके वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठा सकते हैं, जब तक कि हमारा ढाँचा प्रभावी रूप से विकसित नहीं हो जाता है तब तक हमारे पास विदेशी आकड़ों व रिपोर्ट पर विश्वास करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचता है।
 
लेकिन यह भी कटु सत्य है कि देश में भविष्य में जब प्रभावी संसाधन हो जायेंगे और हम वास्तव में अपने छोटे-छोटे शहरों और गाँवों केे प्रदूषणों के आंकड़े संग्रहित करेंगे तो सच्चाई इस विदेशी रिपोर्ट के आंकड़ों से भी कहीं और अधिक गम्भीर व भयावह होगी। ऐसे में पर्यावरण मंत्रालय के लिये तब तक इस तरह की विदेशी रिपोर्ट को देश में वायु प्रदूषण कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जिससे की आने वाले समय में देश में जहरीले वायु प्रदूषण को नियंत्रित किये जाने की दिशा में कारगर प्रभावी कदम उठाने में मदद मिल सकेगी। आज हम सभी लोगों का यह नैतिक कर्तव्य है की जिस पृथ्वी और पर्यावरण में हम रहते है उसका संरक्षण व सुरक्षा स्वयं अच्छे ढंग से करें और उसे प्रदूषित न होने दे। लेकिन बड़े दुःख की बात है की आज का इंसान इतना स्वार्थी हो गया है की पर्यावरण की तरफ वह कोई ध्यान नही दे रहा है। आज हम लोग केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के लिए देश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों अव्यवस्थित ढंग से दोहन कर रहे है, जिसके लिए हम अंधाधुंध पेड़ काट रहे है, गृहकार्य, कृषि व फैक्ट्री के लिए भूमिगत जल का जिस तरह से बेहिसाब दोहन कर रहे है यह स्थिति सभी देशवासियों के लिए बेहद चिंताजनक है। आज देश में अव्यवस्थित औद्योगिक विकास, शहरीकरण और विकास के नाम पर आज हर दिन हम लोग अपने हाथों से पर्यावरण को दूषित कर रहे है। आज प्रदूषण के चलते देश की आबोहवा में रोजाना कार्बन डाईऑक्साइड (CO2) की मात्रा तेजी से बढ़ती जा रही है। लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार को आमजनमानस के सहयोग से इस ज्वंलत समस्या का स्थाई समाधान ढूंढ कर दीर्घकालिक निदान करना चाहिए।
साथ ही देश में अब वह समय भी आ गया है की जब हम सभी देशवासी संकल्प ले कि प्रकृति से हम केवल लेंगे ही नही बल्कि प्राकृतिक संसाधनों व प्रकृति की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाकर प्रकृति को कुछ वापिस भी अवश्य करेंगे, इस संकल्प से ही भविष्य में प्रकृति व पर्यावरण की सुरक्षा हो सकती है।

हम सभी को समझना होगा कि आजकल हमारे देश के सभी शहरों में तरह-तरह का इतना प्रदूषण और शोर है की पक्षी तक भी वहां से पलायन करने लगे है। अब पक्षियों के नाम पर शहरों में सिर्फ कुछ गिने चुने चंद प्रजाति के पक्षी ही देखने को मिलते है। आज शहर व गाँव में तरह-तरह के प्रदूषण की वजह से लोग आयेदिन गम्भीर बीमारियाँ से ग्रसित हो रहे है। प्रदूषण के चलते शहर का तो हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के रोग से ग्रसित हो गया है। देश की राजधानी दिल्ली व उसके आसपास के इलाकों में तो अब इतना वायु प्रदूषण बढ़ गया की लोगों का साँस लेना मुश्किल हो गया। इसलिए अब समय आ गया है कि हम सभी देशवासी सरकार के साथ मिलकर फाईलों से बाहर आकर धरातल पर पर्यावरण के सरंक्षण व सुरक्षा के लिए हर संभव ठोस कारगर उपाय करें। ना कि कभी दीपावली की आतिशबाजी , कभी पराली जलाने, कभी वाहनों के धुएं के चलते प्रदूषण , कभी औधोगिक ईकाईयों से या कभी अत्यधिक निर्माण कार्यो के चलते गम्भीर प्रदूषण हो रहा है पर बात टाल कर सभी अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री ना करें।

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2019

महाराष्ट्र व हरियाणा के विधानसभा चुनाव परिणाम से राजनैतिक दल व विश्लेषक भौंचक्के

महाराष्ट्र व हरियाणा के विधानसभा चुनाव परिणाम से राजनैतिक दल व विश्लेषक भौंचक्के

हस्तक्षेप / दीपक कुमार त्यागी
स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार

महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनावों के परिणाम आ गये हैं, आमजनमानस की सर्वोच्च अदालत के द्वारा दिए गये अंतिम निर्णय को देखकर सभी राजनैतिक दल व राजनैतिक विश्लेषक एकदम भौंचक्के हैं। क्योंकि हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के परिणाम आने से पूर्व, देश के अधिकांश चुनावी रणनीतिकारों का मानना था कि मोदी-शाह की जोडी़ के मैजिक और केंद्र सरकार के हाल के दिनों में लिये गये निर्णयों के चलते महाराष्ट्र व हरियाणा में भाजपा के पक्ष में एकतरफा भारी बहुमत से विजय वाले चुनाव परिणाम नजर आयेंगे। लेकिन बृहस्पतिवार को जब मतदाताओं के द्वारा दी गयी वोटों का पिटारा खुलकर सबके सामने आया तो हर कोई आश्चर्यचकित रह गया, जनता ने महाराष्ट्र में स्पष्ट बहुमत के साथ भाजपा गठबंधन की सरकार और हरियाणा में भाजपा को सरकार बनाने के बहुत करीब लाकर छोड़ दिया है। दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम सत्ता पक्ष, विपक्ष और अधिकांश राजनैतिक विशेषज्ञों की उम्मीद के विपरीत नजर आये। महाराष्ट्र में जहां भाजपा शिवसेना गठबंधन 288 विधानसभा सीटों में से 161 विधानसभा सीटों पर जीतकर सरकार बना रहा है, लेकिन फिर भी भाजपा शिवसेना गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व की उम्मीद व आकलन के अनुसार उनको सीट नहीं मिल पायी है जिससे नेतृत्व आश्चर्यचकित है। वहीं कांग्रेस एनसीपी गठबंधन ने भी महाराष्ट्र में 98 सीटों पर विजय पताका फहरायी, परिणामों में उम्मीद से अधिक सीट जीतने पर कांग्रेस एनसीपी गठबंधन भी आश्चर्यचकित नजर आ रहा है।

वहीं हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों में से 40 विधानसभा सीटों पर चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाने से महज चंद कदम दूर खड़ी भाजपा, उम्मीद के विपरीत जनता के प्रहार से बेहाल नजर आयी और वहीं आपसी खेमेबंदी और तल्ख गुटबाजी से बेहद कमजोर हो चुकी कांग्रेस को जनता ने 31 सीटों पर विजयी बनाकर आक्सीजन प्रदान करके सभी राजनैतिक दलों व पंडितों को भौंचक्का कर दिया है। उधर अभी चंद माह पूर्व जन्म लेने वाली दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी को जनता ने 10 सीटों पर जीताकर अपने भरपूर प्यार से नवाजा कर  राज्य की राजनीति में एक नया विकल्प तैयार कर दिया है।

दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों को ध्यान से देखें तो महाराष्ट्र में भाजपा शिवसेना गठबंधन की स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बनना तय है और हरियाणा में भी देश के गृहमंत्री व चाणक्य की उपाधि से नवाजे जाने वाले अमित शाह के राजनैतिक कौशल से निर्दलीय के सहयोग से भाजपा की पुनः सरकार बनना तय है।

लेकिन विचारयोग्य बात यह है कि दोनों राज्यों में भी भाजपा की सरकार बनने के बाद भी, क्या इन चुनाव परिणामों में कहीं ना कहीं देश में कमजोर होती आर्थिक हालत ने भाजपा की हालात को जनता के बीच कमजोर करने की शुरुआत तो नहीं कर दी है। वहीं अन्य राजनैतिक दलों को भी स्पष्ट संदेश दे दिया हैं कि जनता सत्ता पक्ष से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं है, आप जनहित के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरो तो सही, लेकिन विपक्षी दलों की आरामतलबी व गलत रवैये और जनता को नेतृत्व प्रदान करने वाले चहरे के अभाव के चलते जनता पूर्ण रूप से उनके साथ भी खड़ी नहीं हो पा रही है। कोई माने या ना माने लेकिन इन चुनाव परिणामों से लगता है कि अब लोगों को अपनी रोजीरोटी रोजगार की चिंता सताने लगी है। ये चुनाव परिणाम इस बात को दर्शातें हैं कि अब कुछ मतदाताओं के लिए सरकार के निर्णयों को छोडकर देश की कमजोर होती अर्थव्यवस्था मायने रखती है। जबकि इन चुनावों के प्रचार के दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्षी दलों को जनहित के मुद्दों को छोड़कर केवल अनुच्छेद-370, वीर सावरकर और पाकिस्तान के मसले पर ही उलझाए रखा था। इन विधानसभा चुनावों में सत्ता पक्ष ने सम्पूर्ण चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष को अपने जाल में उलझाये रखा और सत्ता पक्ष ने अपनी चाणक्य नीति से आमजनमानस के हित के किसी भी मुद्दे पर विपक्ष को सरकार से सवाल जवाब करने का मौका ही नहीं आने दिया। लेकिन फिर एक वर्ग के मतदाताओं के मन में कहीं ना कहीं कमजोर होती भारतीय अर्थव्यवस्था इन चुनावों में अंदर ही अंदर बड़ा मुद्दा थी। जिसके चलते ही आज सभी दलों के लिए इस तरह के आश्चर्यजनक चुनाव परिणाम आये है, ये चुनाव परिणाम उस वर्ग की जनता के आक्रोश व प्रेम की ही देन हैं।

वैसे हम आकलन करें तो 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद संपन्न हुए ये दो राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की जोडी़ के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनावों में जनता के द्वारा दिये गये भारी बहुमत से चुनाव जीतने के बाद देश में ये पहले विधानसभा चुनाव हैं। ये चुनाव मोदी सरकार के बेहद आक्रामक महत्वपूर्ण फैसलों जैसे कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाना, कश्मीर मसले पर पाकिस्तान को विश्व समुदाय के बीच अलगथलग करना, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का मसला तथा ट्रिपल तलाक पर मोदी सरकार के द्वारा लगायी गयी रोक जैसे अभूतपूर्व निर्णयों के बाद केंद्र सरकार के द्वारा आम जनमानस के विश्वास पर खरा उतरने की परीक्षा हैं। हालांकि इन चुनावों में भी दोनों राज्यों में भाजपा का राज्य स्तरीय नेतृत्व पूर्व की भांति ही पूर्ण रूप से केवल मोदी-शाह की जोडी़ के मैजिक पर ही निर्भर रहा है।

दोनों राज्यों में सरकार का गठन होने तक शुक्रवार धनतेरस के पावन पर्व के दिन भी सभी दलों की नजरें चुनाव परिणामों पर एकटक टिकी हुई हैं। भाजपा गठबंधन, कांग्रेस गठबंधन व अन्य राजनैतिक दलों के वरिष्ठ नेता, महाराष्ट्र और हरियाणा राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे के साथ-साथ देश के 17 राज्यों में 52 सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणामों के बाद एक-एक सीट का ध्यान से मंथन कर रहे हैं। इस बार महाराष्ट्र व हरियाणा के साथ 17 राज्यों में 50 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर भी उपचुनाव हुए थे। जिनका चुनाव परिणाम देश में भविष्य की राजनीति की दशा व दिशा तय करने वाला है।

हरियाणा व महाराष्ट्र राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जीत हासिल की है लेकिन चुनाव परिणाम पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की उम्मीद के विपरीत आये है। इन राज्यों के चुनाव परिणामों अब स्पष्ट हो गया हैं कि जनता ने भाजपा का 75 सीट पार के मिशन हरियाणा व 220 सीट पार के मिशन महाराष्ट्र के सपने को जबरदस्त झटका दे दिया है। इसका भाजपा पार्टी और उसके नीतिनिर्माताओं को बैठकर आत्मंथन अवश्य करना चाहिए। महाराष्ट्र में भाजपा शिवसेना गठबंधन के चुनाव जीतने के बाद भी और हरियाणा में भाजपा के बहुमत से चंद सीट दूर रहने के बाद भाजपा, विपक्षी पार्टियों व राजनैतिक विश्लेषकों के बीच मौजूदा राजनैतिक हालात को लेकर आत्मंथन का एक नया दौर शुरू हो गया है। देश में राजनैतिक समझ रखने वाले विद्वान इन चुनाव परिणामों का विश्लेषण करने में जुट गये हैं कि ऐसा क्या कारण है जो हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में हरियाणा की खट्टर सरकार और महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है।

आपको बता दे कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रही पंकजा मुंडे अपने गढ़ परली से चुनाव हार गई हैं। पंकजा को उनके चचेरे भाई धनंजय मुंडे ने हराया है।

वहीं दूसरी तरफ हरियाणा में तो भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गजों को जनता ने राजनैतिक पिच पर आऊट कर दिया है। हरियाणा में तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और टोहाना से उम्मीदवार सुभाष बराला को जननायक जनता पार्टी के देवेंद्र सिंह बबली ने बुरी तरह हराया है।

हरियाणा के ही नरनौंद से भाजपा के उम्मीदवार और हरियाणा सरकार में वित्तमंत्री रहे कैप्टन अभिमन्यू को जननायक जनता पार्टी के राम कुमार गौतम ने करारी शिकस्त दी है।

हरियाणा में ही भाजपा सरकार में मंत्री रही कविता जैन सोनीपत सीट से कांग्रेस के उरेंद्र पंवार से हार गई हैं।

हरियाणा की उचान कलां विधानसभा से पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद चौधरी बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को कुछ दिन पहले जन्मीं जननायक जनता पार्टी के दुष्यंत चौटाला ने बुरी तरह हरा दिया है।

हरियाणा में ही आदमपुर विधानसभा सीट से दिग्गज टिकटॉक स्टार और भाजपा उम्मीदवार सोनाली फोगाट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई से चुनाव हार गयी हैं।

हरियाणा में खेल के मैदान से राजनीति के मैदान में कदम रखने वाले पिहोवा से मैदान में उतरे भाजपा उम्मीदवार योगेश्वर दत्त को कांग्रेस के उम्मीदवार श्रीकृष्ण हुड्डा ने हरा दिया।

देश की दिग्गज खिलाड़ी बबीता फोगाट कॉमनवेल्थ गेम्स में दो बार की गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं। उन्होंने इस बार विधानसभा चुनाव को लड़ने के लिए हरियाणा पुलिस की नौकरी भी छोड़ी थी और चरखी दादरी विधानसभा से भाजपा उम्मीदवार बनी थी लेकिन बबीता फोगाट को भी निर्दलीय उम्मीदवार सोमवीर ने हरा दिया है।

वहीं 2019 के लोकसभा चुनावों के परिणाम के बाद अपने अंदुरुनी कलह के मसलों को सुलझाने में बुरी तरह उलझी कांग्रेस पार्टी को जनता ने कुछ संजीवनी जरूर प्रदान कर दी है। हालांकि कांग्रेस अपनी गलत नीतियों व आरामतलबी के आदत के चलते शुरुआत से ही चुनाव प्रचार में पिछड़ती दिख रही थी, लेकिन फिर भी जनता ने नेताओं व राजनैतिक विशेषज्ञों की उम्मीद के विपरीत कांग्रेस व अन्य राजनैतिक दलों की जो स्थिति रखी है, उसने सभी राजनैतिक विश्लेषकों के आकलनों को धवस्त कर दिया है। साथ ही जनता ने कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखने वाले राजनेताओं को भी जबरदस्त झटका दे दिया है। इन चुनाव परिणामों ने देश में मृतप्रायः हो चुकी कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों में वह समय रहते अपने महलों से निकल कर धरातल पर आकर सामुहिक रूप से मेहनत करते तो आज जो चुनाव परिणाम आये हैं वो बदल सकते थे इन राज्यों में कांग्रेस सत्ता में लौटती दिख सकती थी और भाजपा के साथ चल रही कांटे की टक्कर में भी कांग्रेस बाज़ी मारती हुई नज़र आ सकती थी।

इन राज्यों की जनता ने विधानसभा चुनाव परिणाम से सत्ता में बैठे लोगों को भी इस बात का संदेश दे दिया हैं कि देश के मौजूदा आर्थिक व बेरोजगारी के हालातों पर सरकार ने जल्द ही कुछ ठोस कारगर कदम धरातल पर नहीं उठाया तो देश को कांग्रेस मुक्त करने का सपना देखने वाले राजनेताओं व दलों को भविष्य में होने वाले चुनावों में जबरदस्त झटका लग सकता और आने वाले समय में कांग्रेस के बेहद कमजोर हो चुके पंजे में जनता के प्रेम से दोबारा जान आ सकती हैं। लेकिन स्थिति जो भी है सबके सामने अब स्पष्ट हो चुकी है और सबसे बड़ा कमाल जनता ने यह करा है कि इसबार उसने किसी भी राजनैतिक दल को निराश नहीं किया हैं। जनता ने सबकी झोली वोटों से भरकर अमनचैन, प्यार-मोहब्बत, प्रकाश व खुशियों के पावन पर्व दीपावली को भारतीय परम्पराओं के अनुसार शानदार ढंग से मनाने का अवसर प्रदान किया है।

हस्तक्षेप / दीपक कुमार त्यागी
स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार
ईमेल -: deepaklawguy@gmail.com

बुधवार, 23 अक्टूबर 2019

प्रकाश व खुशियों की दीपमाला का पावन पर्व दीपावली

प्रकाश व खुशियों की दीपमाला का पावन पर्व दीपावली

हस्तक्षेप / दीपक कुमार त्यागी
स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार

सनातन धर्म व हमारी भारतीय संस्कृति के अनुसार हम सभी के जीवन में त्यौहारों का विशेष महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ तक कि अगर हम भारत को त्यौहारों की अद्भुत संस्कृति के महाकुंभ की संपन्न विशाल नगरी कहें तो यह कहना भी गलत नहीं होगा। हमारे प्यारे देश में वर्ष भर आयेदिन कोई न कोई पर्व या उत्सव लगातार चलते ही रहते है। हालांकि कुछ उत्सव केवल देश के किसी अंचल मात्र में मनाए जाते हैं तो कुछ उत्सव सम्पूर्ण देश में अलग-अलग नाम व ढंग से मनाये जाते हैं। भारत में शायद ही कोई माह या ॠतु होगी जिसमें हम लोग कोई त्यौहार ना मनाये। यही हमारे भारत की संस्कृति का गौरवशाली इतिहास व आज रहा है। हम भारतीयों के अनुसार पर्व हमारे जीवन में नया उत्साह संचार करने के महत्वपूर्ण आवश्यक कारक होते हैं। जिनकी स्वीकार्यता व महत्ता देश में सर्वव्यापी है। पर्व हमारी जिंदगी में आपसी भाईचारा, प्यार-मौहब्बत, ख़ुशी और हर्षोल्लास का एक अद्भुत नया पुट लाते हैं।

वैसे तो हम भारतीय अपनी मान्यताओं व परम्पराओं के अनुसार रोज ईश्वर की आराधना करते हैं, लेकिन प्रभु की अर्चना के सभी उत्सवों में दीपावली का अपना एक प्रमुख स्थान है। हमारे देश में जितने भी त्यौहार हैं, उनमें दीपावली सर्वाधिक आम से लेकर खास तक सभी के बीच में बहुत लोकप्रिय है। यह त्यौहार जन-जन के मन में हर्ष-उल्लास पैदा करने वाला पर्व है। हमारे यहां प्रार्थना है कि- 'तमसो मा ज्योतिर्गमय:' अर्थात अंधकार से प्रकाश में ले जाने वाला, दीपावली वही पावन त्यौहार है जो हमकों जीवन में एक नई राह दिखाता है। दीपावली के पावन पर्व पर हमारे देश में माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश, माँ काली, भगवान श्रीराम आदि की विशेष पूजा का प्रावधान है।
लेकिन अधिकांश लोग माता लक्ष्मी व भगवान गणेश की विशेष पूजा जरूर करते हैं। वैसे भी अधिकांश लोगों का मानना हैं कि आज के व्यवसायिक समय में माता लक्ष्मी की कृपा के अभाव में किसी भी भौतिक अथवा सांसारिक कार्य का होना असंभव हो गया है, इसलिए इनकों हमेशा प्रसंन्न रखना है। दीपावली पर हम उस कृपालु परम पिता परमेश्वर की विशेष आराधना करते है। उसके बाद दीपक व विभिन्न प्रकार की आधुनिक व प्राचीन दीपमालाओं की झिलमिलाती मनमोहक रोशनी को देखकर अपने जीवन को सकारात्मक उर्जा से भर लेते हैं। बच्चे, बड़े व बुजुर्ग सभी इस त्यौहार पर जमकर पटाखे चलाकर खुशियाँ मनाते हैं। जीवन में इन ढ़ेरों खुशियों की जगमग-जगमग करती दीपमाला को लाने का पावन पर्व ही दीपावली है। दीपावली का पर्व हर वर्ष शरद ऋतू की शुरुआत में आता है। यह पावन त्यौहार भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है और इसको प्रतिवर्ष पवित्र कार्तिक मास की अमावस्या को बहुत ही जोशोखरोश के साथ देश व विदेशों तक में मनाया जाता है। दीपावली सनातन धर्म की गौरवशाली परम्पराओं के अनुसार हिंदुओं का सबसे पवित्र और सबसे बड़ा पावन पर्व माना जाता है। हमारी धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली मनाने की कई कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन दीपावली के दिन लंका युद्ध में रावण का वध करके, भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या नगरी वापस आए थे, तब अयोध्या के सभी वासियों ने भगवान श्री राम के वापस आने की खुशी में अयोध्या को साफ-सुथरा करके दीपों से, फूलो से, जगह-जगह रंगोली बनाकर, पूरी अयोध्या नगरी को दुल्हन की तरह सज़ा दिया था। तब से लेकर आज तक दीपावली मनाने की यह पावन गौरवशाली परम्परा लगातार चली आ रही है। इस दिन हम सभी कार्तिक मास की अमावस्या के गहन अन्धकार को दूर करने के लिए दीपों को प्रज्वलित करके अपने घर-आंगन, गांव-शहर ओर हर जगह को टिमटिमाती जगमग-जगमग करने वाली दीपावली के दियों की रोशनी से जगमगा देते हैं। जो इस त्यौहार की अनोखी छटा को चार चाँद लगा देता है। इस पर्व पर आजकल हम लोग माता लक्ष्मी-गणेश पूजन करने के बाद, अपने मित्रों, पड़ौसियों व नातेदारों के यहाँ जाकर मिठाई उपहार आदि देते हैं। इस त्यौहार में ऐसी शक्ति है कि वह हम लोगों में आपसी प्यार सौहार्द के साथ परिवार की तरह रहने के लिए प्रेरित करता है तथा यह त्यौहार हम सभी के जीवन में एक नई उर्जा का संचार कर देता है। इस त्यौहार को हम लोग दीपावली या आम-बोलचाल की भाषा में दीवाली के नाम से भी पुकारते हैं। दीपावली हम सभी के जीवन में खुशियों के नये रंग भरने वाला बहुत ही शानदार त्यौहार है। जो देश व समाज में हर तरफ प्रकाश की नवज्योति फैलाते हुए लोगों के जीवन को हर्षोल्लास, आनंद से परिपूर्ण कर देता है।

किसी भी सनातन धर्म व भारतीय संस्कृति को मानने वाले व्यक्ति के जीवन में दीपावली का बहुत बड़ा  महत्व होता हैं। शास्त्रों के अनुसार यह त्यौहार व्यक्ति के जीवन को 'अंधेरे से ज्योति' अर्थात प्रकाश की ओर लेकर जाता है। इस त्यौहार पर प्रत्येक सनातनी मनुष्य अपने जीवन के गम के अंधेरों को भुलाकर, जीवन को एक नये उजाले की ओर ले जाने का ठोस प्रयास करता है। मेरा मानना हैं कि आज के भागदौड़ भरे आपाधापी वाले व्यवसायिक दौर में सही में दीपावली वह है जब व्यक्ति अपने मन के अंधेरों को प्रण लेकर स्थाई रूप से खत्म करके, जीवन में प्रकाशमयी सकारात्मक उर्जा के साथ लोगों के साथ मिलजुलकर प्यार मोहब्बत से जीवन लीला का भरपूर आनंद ले। तब ही जीवन में प्रकाश व खुशियों की दीपमाला को झिलमिलाने वाले पावन पर्व दीपावली के त्यौहार का असली उद्देश्य पूर्ण होता है।

रविवार, 20 अक्टूबर 2019

आतंक के आका पाक पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक-3 का प्रचंड प्रहार

आतंक के आका पाक पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक-3 का प्रचंड प्रहार

दीपक कुमार त्यागी
स्वतंत्र पत्रकार व स्तंभकार

हर वक्त भारत में आतंकवाद को बढावा देने की फिराक में रहने वाला आतंकियों का आका नापाक पाकिस्तान अपनी कायरता पूर्ण हरकतों से कभी बाज नहीं आने वाला है. जबकि आज उसके हालात यह हैं कि वो दाने-दाने के लिए मोहताज है और बर्बादी के कगार पर पहुंच चुका हैं. लेकिन उसके बाद भी पाकिस्तान आये दिन कायरता की नई मिसालें बनाता जा रहा है. वैसे तो आतंकियों का आका पाक भारत की तरक्की से जल-भुन कर हमेशा बैठा रहता हैं. लेकिन सच्चाई यह भी है कि पाक का राजनैतिक नेतृत्व व सेना पाकिस्तान की अंदरूनी अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए, आयेदिन भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए सीजफायर का उल्लंघन करता है और फिर जब भारतीय सेना हमले का मुँहतोड़ जोरदार जवाब देती है, तो पाकिस्तान तुरंत हाथ खड़े कर विश्वसमुदाय के सामने जान बचाने के लिए गिड़गिड़ाना शुरू कर देता है. कुछ ऐसा ही नजारा एक बार फिर रविवार को देखने को मिला है, जब भारतीय सेना के जाबांज जवानों के प्रचंड प्रहार के बाद पाकिस्तान फिर से गिड़गिड़ाने लगा.

जिस तरह से पाकिस्तान सेना ने आतंकियों को भारत में घुसपैठ करवाने के उद्देश्य से कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर के गुंडी गुजरा में शनिवार रात दस से सुबह चार बजे तक फायरिंग करके आम नागरिकों को निशाना बनाया है वह निंदनीय है. पाक की इस गोलीबारी में भारतीय सेना के दो वीर जवान शहीद हो गए हैं. जबकि एक आम नागरिक की मौत हो गई है. वहीं तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पाक सेना के सीजफायर उल्लंघन के बाद पाक की नापाक हरकतों का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने भी पाक पर प्रचंड प्रहार करते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के अंदर स्थित आतंकवादी शिविरों पर हमले किये हैं. भारतीय सेना के द्वारा यह कार्यवाही पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को भारतीय सीमा क्षेत्र में घुसपैठ कराने की कोशिश को नाकाम करने के उद्देश्य से की गयी है.

यहाँ आपको बता दे कि भारतीय सेना को शनिवार रात विश्वसनीय सुत्रों से पता चला था कि पाकिस्तान के पीओके में स्थित जुरा, अथमुकम और कुंडलसाही में आतंकी लॉन्च पैड्स पर कई आतंकवादी मौजूद हैं. लेकिन जब पाकिस्तान की सेना ने उनको भारत में घुसपैठ करवाने के उद्देश्य से संघर्षविराम का उल्लंघन कर फायरिंग शुरू कर दी, तो आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ कराने की कोशिश को हमारी सेना ने नाकाम कर दिया और भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पीओके स्थित पाक के आतंकी लॉन्चिंग पैड्स को निशाना बनाया और उन्हें नष्ट कर दिया हैं.

इस घटनाक्रम के बाद रविवार को भारतीय सेना की तरफ़ से एक बयान जारी कर कहा गया है कि पाकिस्तान ने बिना कोई उकसावे के आम भारतीय लोगों पर गोलीबारी की है. सेना के मुताबिक़ गुंडीशत गाँव और तंगधार में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हुई है और तीन लोग ज़ख़्मी हुए हैं. सेना के बयान में कहा गया है कि इस गोलीबारी में 55 वर्ष के मोहम्मद सादिक़ मारे गए. इसके अलावा 70 वर्ष के मोहम्मद मक़बूल, 50 वर्ष के मोहम्मद शफ़ी और 22 वर्ष के युसूफ़ हामिद ज़ख़्मी हुए हैं. भारतीय सेना की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान ने युद्धविराम उल्लंघन भारतीय इलाक़े में अपने आतंकवादियों की घुसपैठ के लिए किया था.
इसके जवाब में भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पीओके स्थित आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाकर नष्ट करके दिया हैं.

वहीं भारत के थल सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने मीडिया को बताया है कि इस कार्रवाई में पाकिस्तान के कम से कम छह से दस सैनिक मारे गए हैं. जबकि उनके तीन कैंप तबाह हो गए है. जनरल बिपिन रावत के मुताबिक इस कार्रवाई में पाकिस्तान सीमा में छह से 10 चरमपंथी आतंकी भी मारे गए हैं.

दरअसल जब से जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाया गया हैं तब पाकिस्तान का राजनैतिक नेतृत्व व पाक सेना बहुत परेशान हैं और वो अपनी आर्थिक व राजनैतिक नाकामी को छिपाने के लिए पिछले काफी वक़्त से पाक सेना सीमापार से आयेदिन भारी गोलीबारी करती रहती हैं. जिसमें  भारतीय जवानों समेत कई आम नागरिक मारे गए हैं. भारतीय सेना को सरकार की ओर से जवाब देने की खुली छूट है. जिसके चलते रविवार को भारत के जवानों ने पाक स्थित आतंकियों के कैंप पर अपनी तोपों से इतने बम बरसाए कि उसने एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक की याद दिला दी. भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक-3 के द्वारा पीओके स्थित अग्रिम आतंकी लॉन्च पैड्स को ध्वस्त कर पाक को करारा जवाब दिया हैं.