शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

*देश के राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का 21वीं सदी के भारतीय युवाओं के लिए महत्व*

*देश के राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का 21वीं सदी के भारतीय युवाओं के लिए महत्व*                                  देश 26 जनवरी 2019 को अपना 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा होगा देश में हर तरफ हर्षोल्लास का माहौल होगा बाजारों में तिरंगों की बाढ़ होगी हर तरफ देशभक्ति से ओतप्रोत बाजार होगा लेकिन साथ ही साथ सोचने वाली दुखद बात यह भी है कि चंद लोगों को छोड़कर अधिकांश की देशभक्ति में बाजारवाद हावी होगा, जिसको हासिल करने के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था आज उस पर देशभक्ति व सादगी की जगह बाजारवाद हावी है  लेकिन आज सबसे बड़े अफसोस की बात यह है कि 21वीं सदी के देश के युवाओं की हालात देखकर लगता है कि उनमें से अधिकांश के लिए 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का दिन केवल और केवल पिकनिक मनाने का दिन बन गया है जो सरासर गलत है अरे भाई पिकनिक भी मनाओं लेकिन अपने देश के लिए अपना सभी कुछ बलिदान करने वालों को कम से कम सादगी व दिल से याद तो कर लो। आज की युवा पीढी में अधिकांश को भी इस बात से कोई सरोकार नहीं होगा कि इस दिन को देखने के लिए हमारे पूर्वजों ने कितने बलिदान दिये है।  इस दिन को देखने के लिए हमारे अनगिनत पूर्वजों ने फांसी के फंदे पर झूलने का काम किया है ना जाने कितने बच्चों, युवाओं व बुजुर्गों ने अपनी जिंदगी के अनमोल पलों को जेल के सीखचों में बिताने का काम किया था । तब जाकर हमको 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी और उसके उपरांत 26 जनवरी 1950 को "भारत सरकार अधिनियम एक्ट 1935 " को हटाकर सुबह 10.18 मिनट पर  "भारत का संविधान" लागू किया गया था । एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज्य स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था । साथ ही भविष्य में 26 जनवरी का महत्व बरकरार रखने के लिए संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गयी थी । यहाँ सभी के मन में यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि 26 जनवरी को ही भारत का संविधान क्यों लागू किया गया तो उसके लिए हमको इतिहास के झरोखे में जाकर झाकना होगा । इसके लिए हमको सन् 1929 दिसंबर में लाहौर में "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस" का अधिवेशन जो कि पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की अध्यक्षता में हुआ था उस पर नज़र डालनी होगी इस अधिवेशन में ही आजादी के सभी दिवानों ने प्रस्ताव पास करके घोषणा की थी कि यदि अंग्रेज  सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को एक "स्वायत्तयोपनिवेश"  (डोमीनियन) का पद प्रदान करेगी जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित देश बन जाता, वरना उसके बाद "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस" भारत को पूर्ण स्वराज घोषित कर देगी लेकिन अंग्रेजों ने  26 जनवरी 1930 तक ऐसा कुछ भी किया नहीं किया उसके बाद अंग्रेजों को मुहतोड़ जवाब देते हुए फिर "26 जनवरी 1930 " को "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस" ( INC) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित कर अपना बहुत ही जबरदस्त सक्रिय आंदोलन प्रारम्भ किया था और 26 जनवरी को सन् 1930 से हर वर्ष देश की आजादी 15 अगस्त 1947 तक गणतंत्र दिवस के रूप में आजादी के दिवानों द्वारा मनाये जाने लगा इसलिए ही देश की आजादी के बाद देश के नीतिनिर्माताओं ने इस दिन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में चुना था । आज इस पावन राष्ट्रीय पर्व पर हम सभी को सकंल्प लेना चाहिए कि हम कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे देश व समाज की अहित हो हमेशा सकारात्मक सोच व उर्जा के साथ देश व समाज हित का कार्य करेंगे ।। जय हिन्द जय भारत , मेरा भारत मेरी शान मेरी पहचान ।। - दीपक त्यागी एडवोकेट , अध्यक्ष , श्री सिद्धिविनायक फॉउंडेशन (SSVF) गाजियाबाद , उत्तर प्रदेश , भारत